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महामना की जन्म जयंती

  आलोचक कहते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री 'नरेंद्र मोदी 'को अपने पुरखे प्रधानमंत्रियों में प्रथम प्रधानमंत्री 'नेहरू' से विशेष प्रेम है।इसलिए वह समय समय पर अपनी ओट छिपाने के लिए उनको आगे करते रहते है।पर बीते दिनों अटल स्कूल ऑफ पॉलिटिक्स के विद्यार्थी रहे राजनाथ सिंह ने भी अपनी एक सभा में उनको स्मरण किया। राजनाथ सिंह जी ने गुजरात में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बाबरी के मुद्दे पर नेहरू जी सरकारी खजाने से पैसा खर्च करके बाबरी मस्जिद बनवाई जानी चाहिए। उसका भी विरोध यदि किसी ने किया था तो गुजराती मां की कोख से पैदा हुए सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया था।जिसके बाद कांग्रेस ने इस पर कड़ी आपत्ति की थी।साथ ही साथ बहुत सारे पत्रों का हवाला भी दिया था।यही नहीं इसी के आस पास Nehru archive भी आम लोगों के लिए शुरू हो गया।यह सब चल ही रहा था तो मेरी भी दिलचस्पी नेहरू को लेकर नए सिरे से बढ़ी।दरअसल इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है तो लाइब्रेरी के बाहर खुली धूप में बैठना हो रहा है। वहां बैठे बैठे एक दिन यह सब सोच रहा था तो वहां लाइब्रेरी के सामने ही एक प्रशस्ति जैसा पत्थर है।जिस पर...

यतीन्द्र मिश्र

  उस्ताद अमीर खान का आनंदी कल्याण और हंसध्वनि मालिनी राजुरकर की मालकौंस की बंदिश- नभ निकस गयो चंद्रमा प्रभा आत्रे का मारू बिहाग , कलावती भीमसेन जोशी का यमन, दुर्गा और भैरवी पंडित जसराज का हवेली संगीत किशोरी आमोनकर का भिन्न षड्ज, भीमपलासी, जौनपुरी और शुद्ध कल्याण गंगुबाई हंगल का संपूर्ण संगीत केसरबाई केरकर का कोमल ऋषभ आसावरी  शोभा गुर्टू के गाए सारे दादरा गिरिजा देवी की ठुमरियां और राग बसंत मुखारी उस्ताद निसार हुसैन खान का राग बसंत बेगम परवीन सुल्ताना का भैरवी सादरा -भवानी दयानी वीणा सहस्रबुद्धे का राग हमीर, बसंत, बहार, हिंडोल मालविका कानन का राग भीमपलासी पंडित दिनकर कैनकिनी का भैरवी में- पनघट पे जल भरन उस्ताद बड़े गुलाम अली खान की ठुमरी -तोरी तिरछी नजरिया के बान मालिनी राजुरकर की सलग्वराली की बंदिश -सुमेर साहिब सुल्तान आलम उस्ताद राशिद खान की मधुवंती सविता देवी का बारामासा सिद्धेश्वरी देवी की सारी ठुमरियां अश्विनी भिड़े देशपांडे की जौनपुरी और कृष्ण भजन जुथिका रॉय की -जोगी मत जा पंडित वसंतराव देशपांडे की बंदिश -बिंदिया ले गई हमार रे मछरिया  पंडित वसवराज राजगुरु की भैरवी...
  Virat Kohli | Player of the Series:  Honestly, playing the way I have in the series is the most satisfying thing for me. I feel really free in my mind. I haven't played like this in 2-3 years. I know when I can bat like that in the middle, it helps the team a long way. Makes me confident, any situation in the middle, I can handle that and bring it in favor of the team. When you play for that long - 15-16 years, you do doubt yourself. Especially as a batter when one mistake can get you out. It's a whole journey of getting better and getting better as a person along the way. It improves you as a person and it improves temperament as well. I'm just glad that I'm still able to contribute to the team. When I play freely, I know I can hit sixes. There's always levels you can always unlock. The first one at Ranchi - because I hadn't played a game since Australia. Just how your energy is on the day, Ranchi is very special for me and I'm very grateful as to how the...
  ईडन गार्डेन के बाद बावुमा और बुमराह की एक तस्वीर वायरल हुई थी।मैच में बुमराह ने बवुमा को बौना बोल दिया था।उसके बाद जो हुआ उस पर विस्तार से कभी बात होगी।लेकिन दूसरे टेस्ट मैच के हीरो रहे यानसन और कोहली का मैच अप पुराना।साल 2018 में भारत अफ्रीका के दौरे पर थी।उसी वक्त यानसन और उनके भाई कू यानसन से कोहली से मिलने वांडर्स पहुंचे। Virat Kohli | Player of the Match: Well, today was really nice to kind of get into the game like that. The pitch played quite decently in the first 20-25 overs before it started to slow down. So, I just felt like, you know, let me just go out there and just hit the ball. Not think too much about any of the other stuff. It's just me and the ball coming at me and just enjoy the game of cricket, which was the very reason I started playing this game. So, it was just about staying in the space of enjoyment and, of course, when you get a start and you get into the situation, then you know what you've done over so many years and the experience kicks in and then...

बिहार विधानसभा

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आ गए है।राजग को इस तरह के परिणाम की भी आशा नहीं रही होगी।वहीं महागठबंधन जो चुनाव से पहले ही शपथ की तैयारी कर रहा था उसे अब इस परिणाम के शपथ पर मंथन की जरूरत है।दूसरी तरफ चुनाव से पहले जनसुराज व प्रशांत किशोर के दावे की जमीनी हकीकत पर जो परिणाम आया वह भी कम आश्चर्यचकित नहीं करता।जहां चुनाव से पहले उनके ऊपर एक्स फैक्टर के लेख आते थे।अब उनके राजनीतिक अंत तक की बात लिखी जा रही है।लेकिन यह कहने में कोई गुरेज नहीं कर सकता कि उन्होंने बिहार में जनता के मुद्दे को उठाया और एक नैरेटिव तैयार किया।पर बिहार की राजनीति में मुद्दों से ज्यादा मास लीडर व जाति की चर्चा न आए।ये हो नहीं सकता Caste has served since Independence both as an instrument of political democratic India, castes—as a social unit—have always been perceived as a strong vehicle of improving access to power and promotion of interests and it continues to matter. Increased political significance of castes has provided them a greater social hold. Democracy, industrialisation and an equitable economic redist...
 मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में प्रो.जी एन देवी का व्याख्यान था जिसका विषय INDIA AS A LINGUISTIC CIVILIZATION था। अपने व्याख्यान के आरंभ में भी प्रो जी एन देवी कुछ महत्त्वपूर्ण बातें कही जिसमें मूल्य और अनुशीलन की बात प्रमुख थी कि इसका नाम ही है कुछ सार्थक करिए।महामना हमेशा इसी के लिए प्रयासरत रहे।एक तरफ तिलक यदि हिमालय की तरह थे तो मालवीय गंगा की तरह थे।निर्मल,पवित्र व सहिष्णु।वो तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।पूना फैक्ट में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की।यही नहीं संविधान के जो प्रियमेबल है उसकी अवधारणा की नींव कराची रिजॉल्यूशन से निकली है जिसके सूत्रधार महामना थे।पर उनके ऊपर कोई भी शोधपरक जीवनी नहीं है।आप लोगों को लिखना चाहिए.... अपने विषय के ऊपर कहा कि मराठी व गुजराती में civilization जैसा कोई शब्द नहीं है।हम culture को भी इससे जोड़ते है लेकिन दोनों अलग है।इस शब्द का पहली बार प्रयोग एडवर्ड गिब्बन ने 18 वीं शताब्दी में अपनी पुस्तक The History of the Decline and Fall of the Roman Empire में किया।यही नहीं जब अंग्रेज भी भारत आए तो उन्होंने कहा था कि हम भारतीयों पर शासन नहीं बल्कि उ...

अंधेरे में

 अंधेरे में स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से दीपिका पादुकोण को मेंटल हेल्थ पर बोलते हुए पहली बार सुना था।तब साल 2017 का था।उसके बाद से भारत में अलग अलग सेलिब्रेटी ने मेंटल हेल्थ के मुद्दे पर बोलना शुरू किया।तब मानस का परिष्कार नहीं हुआ था।आम लोगों की तरह मुझे भी यही लगता था कि मेंटल हेल्थ के नाम पर अपनी कमजोर को छुपाया जा रहा है।लेकिन विश्वविद्यालय में पठन पाठन से मानस का परिष्कार हुआ। और लोगों से इस विषय पर बातचीत हुई।तब जाकर इस विषय की गंभीरता समझ आई।बीते दिनों बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में इसी विषय पर एक नाटक देखने पहुंचा।नाटक का नाम 'अंधेरे' में था।पहली बार मुझे लगा कि नाटक मुक्तिबोध की कविता अंधेरे में को एडॉप्ट करके तैयार किया गया है।इसलिए हाल में पहुंचने के बाद मुक्तिबोध की कविता पढ़ता रहा।लंबी कविता थी और एंकर की तरफ से अनाउंसमेंट हो रहा था कि नाटक वीसी साहब के थोड़ी देर में पहुंचने के बाद शुरू होगा।तब तक अंधेरे हाल में अंधेरे में कविता पढ़ता रहा।इसलिए की नाटक समझ आए क्योंकि हिन्दी में ऐसी धारणा है कि मुक्तिबोध की कविता कठिन है।उनकी कविता आसानी से...

बंगाल में काली पूजा

पिछले दिनों अपने सीनियर के साथ बनारस में लक्सा स्थित रामकृष्ण आश्रम में दुर्गा पूजा में शामिल होने का योग बना।यहां दुर्गा की विधि विधान से पूजा तो देखा ही साथ साथ बंगाल की संस्कृति को करीब से समझने का अवसर भी रहा।यही नहीं कुछ नई बातें भी पता चली जिसमें शरद पूर्णिमा के दिन यहां लक्ष्मी पूजा मनाई जाती है।जबकि उत्तर भारत में लक्ष्मी पूजा अमावस्या के दिन होती है।वहीं उत्तर भारत में जब दीपावली मनाई जाती है तो बंगाल अपितु असम में काली पूजा की होती है।काली पूजा को लेकर द हिन्दू अखबार में संदीप रॉय Growing up with Kali in Kolkata नाम से लेख लिखा था।जिसमें उन्होंने आर जी कार मेडिकल में हुए बलात्कार के बाद मुख्यमंत्री के एक बयान को उद्धृत किया है।जिसमें मीडिया रिपोर्ट्स में से कहा गया है कि ममता ने कहा कि जिसकी जैसी इच्छा है वो उस हिसाब से कहीं भी आ जा सकता है लेकिन प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में वो हॉस्टल से रात को 12:30 कैसे निकली ?और वो यदि लड़की है तो उसे रात को नहीं निकलना चाहिए था।इसके बाद राजनीतिक सरगर्मी कैसे बढ़ी ?ये सब ने देखा है।लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं है।जब ऐसे बयान आते है दिल्ली में ...

कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली

बनारस में लल्लनटॉप अड्डा हो रहा था। लल्लनटॉप अड्डा के मंच पर पांच विद्वान मौजूद थे।उनमें प्रोफेसर अवधेश प्रधान व व्योमेश शुक्ल भी थे।अड्डा के आरंभ में ही सौरभ द्विवेदी ने प्रोफेसर अवधेश प्रधान से बनारस को लेकर प्रश्न किया कि बनारस को लेकर बहुत सारे मिथ ,बहुत सारा रोमैनटिसीजम चलता है।आप बनारस को किस दृष्टि से देखते है?एक वो दृष्टि है,जिस ढंग से पेश किया जा रहा है।पिछले पांच,दस ,पंद्रह ,बीस साल से, वो टूरिज्म वाला बनारस है।और एक बनारस  है,जो यहां के लोग जीते हैं,जो यहां की हवा की मलंगई के साथ घुला मिला है। इसके उत्तर में प्रोफेसर अवधेश प्रधान ने कहा कि बनारस का जो रोमांटिक चेहरा है,वो उसकी मस्ती का चेहरा है।और उसकी लोक संस्कृति का चेहरा है।लेकिन क्लासिक रूप से तो काशी यानि प्रकाश की नगरी है............. इस प्रकाश की नगरी में दीपावली के बाद पुनः प्रकाश होने जा रहा है।अब बारी देव दीपावली की है।पौराणिक आख्यानों में इसकी क्या कहानी है ?और आज के समय  बनारस में देव दीपावली में कितना बदलाव आया है?आगे के लेख में इन्हीं पर चर्चा है.....  हिन्दू धर्म में पूर्णिमा का अपना ही महत्त्व ह...

बास्केटबॉल का गणित

एक जमाने में DVD का क्रेज हुआ करता था।उसमें फिल्मों का कैसेट लगता और टीवी पर फिल्में चलती।पर फिल्म आज की तरह जब मन किया ओटीटी खोला देख लिया ऐसा नहीं था।तब किसी के बियाह या बारात का इंतजार करना होता था।क्योंकि बारात आती तो उसमें पर्दे पर फिल्म चलती या आर्केस्टा का डांस होता।पर्दे पर फिल्म देखने के लिए तो कभी परमिशन मिल भी जाती लेकिन आर्केस्टा के लिए कभी नहीं ऐसा होता।वो समय शील का था।अब वो बचा नहीं क्योंकि आज आप किसी को रोक नहीं सकते।दूसरी तरफ फिल्म देखने का एक समय सरस्वती पूजा के समय होता था।उस समय जहां जहां सरस्वती जी की मूर्ति होती वहां पर्दे पर या टीवी पर फिल्म जरूर चलती थी।एक दफा मेरे अपने मोहल्ले में सरस्वती की मूर्ति रखी गई।सबका विचार बना कि उधार पर टीवी व डीवीडी लाया जाए।यहां भी रात में फिल्म चलेगी।यह सब तय हो गया तो पेंच फंस गया कौन सी फिल्म चलेगी?हम ने कहा कि कोई मिल गया चलाइए।खूब आनंद भी आएगा और हर कोई देख भी सकता है।फिल्म की  कहानी एक कम आइक्यू वाले लड़के और एलियन के जादू से आए परिवर्तन पर थी।जिसमें एक सीन बास्केटबॉल का भी है।जिसमें बास्केटबॉल का मैच होता है।एक तरफ फिल्म...

गोपाल पाठा

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  हाल ही में बंगाल फाइल्स का ट्रेलर आया है।ट्रेलर के रिलीज से ही विवाद नत्थी हो गया है।जैसे कश्मीर फाइल्स को भी लेकर हुआ था।जो 1990में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए ननरसंहार  पर केंद्रित थी।यहां 1946 में डायरेक्ट एक्शन प्लान के समय हुए भीषण दंगों का।लेकिन ट्रेलर आने के बाद जो चेहरा सुर्खियों में आया है बंगाल फाइल्स का एक दृश्य क्रेडिट बंगाल फाइल्स ट्रेलर  इन्हीं का है।इनका नाम है गोपाल पाठा जो ट्रेलर में कहते है भारत हिन्दुओं का राष्ट्र है।कॉलेज स्ट्रीट के सामने इनकी मीट की दुकान थी।इनका खुद का अपना एक अखाड़ा था आज के भाषा में गैंग।इसी अखाड़े के लड़कों ने दंगों के समय हिन्दुओं की रक्षा की।कांग्रेस के अध्यक्ष रहे bc रॉय इनके दोस्त हुआ करते थे।लेकिन कहने वाले कहते हैं गुंडों को राजनीतिक सरंक्षण की आवश्यकता होती है।यहां भी कुछ वैसा ही मामला था।इसी दंगे के बाद गांधी यहां आए थे लोग उनके चरणों में अपना शस्त्र रखते।लोगों ने गोपाल पाठा से भी कहा तुम अपना शस्त्र गांधी के चरणों में क्यों नहीं रख देते ?पाठा ने कहा कि इन शास्त्रों से मैंने अपने मोहल्ले की महिलाओं की ,लोगों की जान बचाई ह...

बाढ़ किसी के लिए राहत किसी के लिए मुसीबत

गांव के उत्तरी छोर पर दाखिल होने पर एक अधकचरा खड़ंजा है।जिसके दोनों तरफ खेतों का एक बड़ा चक हैं।कुछ खेतों में पानी भरा है।जबकि एकाद खेत में पानी के ऊपर धान की फसल दिखती है।जो बाढ़ के पानी से बदरंग हो गई है।उसका हरा रंग उड़ गया है।खड़ंजे से आगे बढ़ने पर एक बगीचा है जिसमें एक पोल के ऊपर कुछ लोग बैठे हैं।ये वही लोग हैं जिनके खेतों में बाढ़ का पानी घुस गया था।वो अपनी खेती व बाढ़ से हुए नुकसान पर बातचीत करते हैं।वहीं मझौले किस्म के किसान पीयूष राय बातचीत में कहते है कि पिछली बार तो कुछ खाने और बेचने का इंतजाम हो गया था।लेकिन इस बार जिस दिन रोपाई हुई उसके अगले ही दिन पानी भर गया।एक खेत में तो बीज रखा गया था वो बिना रोपे ही बह गया।उन्हीं के बगल में लिटिल राय जो पूरी तैयारी कर रहे थे कि उनका खेत रोप दिया जाए,लेकिन बाढ़ के पानी को देखकर वो पीछे हट गए।अब पानी उतर गया है तो फिर से तैयारी कर रहें है।वहीं ताल के नीचे की तरफ पारस राय का खेत है कहते है कि पानी उतर तो गया है लेकिन तीन बार बढ़ता घटता है।अभी तो एक बार ही पानी बढ़ा है।जगह जगह बादल फट रहें है तो पानी एक बार आयेगा तो जरूर पर पानी जिन खेतों...

एंडरसन तेंदुलकर ट्राफी के मध्य मंसूर अली पटौदी

  भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट श्रृंखला चल रही है।इस श्रृंखला को पहले पटौदी ट्रॉफी के नाम से जाना जाता था।लेकिन इस दौरे पर इसका नाम बदलकर तेंदुलकर एंडरसन ट्रॉफी कर दिया गया है।ट्रॉफी के नाम बदलने पर पटौदी परिवार की प्रतिक्रिया भी आई।शर्मिला टैगोर ने कहा कि मुझे उनकी तरफ से कोई खबर नहीं मिली है, लेकिन ECB ने सैफ को एक पत्र भेजा है जिसमें कहा गया है कि वे ट्रॉफी को रिटायर कर रहे हैं। अगर BCCI टाइगर की विरासत को याद रखना चाहती है या नहीं रखना चाहती, तो यह उनका निर्णय है।"बाद में वो इस फैसले से दुःखी भी थी।वहीं दूसरी तरफ सचिन की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान तक नहीं आया जिससे उनके फैन्स को भी चौकाया।लेकिन सचिन तेंदुलकर ने स्काई स्पोर्ट्स से बातचीत में अपनी चुप्पी तोड़ी।स्काई स्पोर्ट्स से बातचीत में सचिन ने कहा कि मैंने पटौदी फैमिली से फोन पर बातचीत की और हम ने ये तय किया कि किसी तरह की उनकी लेगसी को बनाए रखा जाए।साथ ही साथ मैंने इसके लिए जय शाह ,Bcci व Ecb से भी बातचीत कि कुछ नया इंट्रड्यूस किया जाए जो पटौदी फैमिली में पहले कभी नहीं हुआ हो।ये हुआ भी जीतने वाले कप्तान क...

लोहिया ने महिलाओं के संबंध में क्यों कहा था हिंदुस्तान का दिमाग सड़ा गला है

पिछले दिनों प्रेमानंद महाराज का एक बयान खूब वायरल हुआ।उनके बयान के बाद बहुत सारी प्रतिक्रियाएं भी आई। कुछ लोग उनके बयान से सहमति भी जता रहे थे वहीं कुछ लोग आधुनिक समाज में संत के इस बयान पर नाराज भी दिखे।ऐसे में सवाल उठता है प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा? दरअसल अपने भक्तों के सवाल के जवाब में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आजकल बच्चों और बच्चियों के चरित्र पवित्र नहीं है तो अच्छे कैसे आएंगे।हमारी सारी माताओं बहनों के पहले रहन-सहन देखो।हम अपने गांव की बात बता रहे हैं। बूढ़ी थी पर इतने से नीचे इतना घूंघट रखती थीं।आज बच्चे बच्चियां कैसी पोशाकें पहन रहे हैं ?कैसे आचरण कर रहे हैं? एक लड़के से ब्रेकअप दूसरे से व्यवहार फिर दूसरे से ब्रेकअप फिर तीसरे से व्यवहार और व्यवहार व्यभचार में परिवर्तित हो रहा है।कैसे शुद्ध होगा? मान लो हमें चार होटल के भोजन खाने की जबान में आदत पड़ गई है तो घर की रसोई का भोजन अच्छा नहीं लगेगा। जब चार पुरुष से मिलने की आदत पड़ गई है तो एक पति को स्वीकार करने की हिम्मत उसमें नहीं रह जाएगी। ऐसे ही लड़का जब चार लड़कियों से व्यभिचार करता है तो वो अपनी पत्नी से संतुष्ट नहीं रहेगा...

चेस खिलाड़ी Praggnanandhaa

प्रेमचन्द की कहानी है शतरंज के खिलाड़ी जो अवध  के अवसान पर केंद्रित है।इसी अवध में मेरे चेस के ट्रेनर राजन पांडे जी ने चेस की बेसिक ओपनिंग E4 सिखाया था। राज शमानी को Praggnanandhaa ने उनके पॉडकास्ट प यही खेल सिखाया।साथ ही साथ अपने चेस जर्नी के बारे में भी बातें कही।शमानी के इन्सिक्योर के प्रश्न पर Praggnanandhaa ने कहा कि वो इन्सिक्योर महसूस कर रहे थे जब उनके जेनरेशन के लोग सफलता अर्जित कर रहे थे लेकिन अब वो ऐसा महसूस नहीं करते।अब वो उनसे इंस्पायर होते हैं।यही नहीं मैग्नस कार्लसन को रात के दो बजे हराने से लेकर चेस की साइकोलॉजी,चेस की ऑडियंस बूम में सागर शाह व समय रैना ने बड़ा काम किया।लेकिन समय को एक जोक के लिए समय से पीछे धकेल दिया गया।पर इस पॉडकास्ट की जो रिल कटेगी वोPraggnanandhaa विभूति वाले जवाब पर कि we come from ashesh and go back to ashesh.

बहुपति प्रथा जो सोशल मीडिया पर छाई

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हिमाचल प्रदेश आज कल सुर्ख़ियों में है।कभी बाढ़ की त्रासदी से कभी उस त्रासदी पर कंगना के बयान से।लेकिन अभी जिस कारण हिमाचल सुर्खियों में है।उसका कारण एक शादी है।हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में एक महिला से दो भाइयों ने शादी की है।शादी में बकायदा 4000 मेहमान भी शरीक हुए हैं।शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हुई और लोगों के बीच में बहुपति प्रथा को लेकर चर्चा भी चली।खैर प्रदीप नेगी व कपिल नेगी नाम के इन भाइयों की एक तरफ तारीफ है तो दूसरी तरफ प्रश्न चिन्ह भी कि आधुनिक समाज में इस तरह की शादी के क्या मायने है?इंटरनेट पर इसी सवाल को लेकर ही बहस है।वहीं दूसरी तरफ जिस समुदाय से ये दोनों भाई आते हैं वहां इस तरह की प्रथा ही रही है। इसी सप्ताह प्रो. कृष्णनाथ का यात्रा वृतांत स्पीति में बारिश पढ़ रहा था।उसमें भी एक प्रसंग में ऐसी प्रथा का वर्णन आता है  वो लिखते है " लाहुली बड़े लड़वय्या होते हैं। प्रायः   हर परिवार में से एक पलटन में जाता है।बड़े भाई का विवाह होता है।द्रौपदी वाद यहां चलता है।एक ही स्त्री सब भाइयों की पत्नी होती है।कहते हैं इसमें कलह नहीं ह...

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश जी का नागरी प्रचारिणी में व्याख्यान

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  नागरी प्रचारिणी सभा के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का आयोजन था।कार्यक्रम के दूसरे दिन राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश जी ने "दो सौ वर्षों की देहरी पर हिन्दी पत्रकारिता का भविष्य "  पर अपने विचार रखे....... हरिवंश जी बीएचयू के पुरा छात्र है,उनको सुनना हमेशा रोचक होता है।हर बार वो तैयारी के साथ आते है।उनके बातचीत में बहुत सारी पुस्तकों का रेफरेंस आता है और उनका आग्रह भी रहता है कि आप इन पुस्तकों को पढ़िए।इन्हीं प्रसंगों के बीच  उन्होंने एक बड़ी महत्त्वपूर्ण बात कही।उनका कहना था कि दुनिया को लगता था कि विचारधारा दुनिया को बदल देगी।लेकिन पुनर्जागरण के बाद टेक्नोलॉजी ने अलग ही बदलाव किया।वो कछुआ व खरगोश कहानी का उदाहरण देते है। उस कहानी की तरह आज टेक्नोलॉजी ड्राइविंग सीट पर है। यही  नहीं  अपने बातचीत का समापन उन्होंने बनारस को याद करते हुए किया।जहां उन्होंने अपने मेंटर कृष्णनाथ जी को याद किया ।वहीं काशीनाथ सिंह के काशी का अस्सी के एक प्रसंग का भी जिक्र किया।प्रो.कृष्णनाथ से उनकी चर्चा हो रही थी भारतीय संस्कृति व पश्चिम संस्कृति को...

हाथ को आया मुंह को न लगा

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  भारत व इंग्लैंड के बीच तीसरा टेस्ट लार्ड्स में था,जहां इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 387 रन बनाएं।वहीं इसके जवाब में भारत ने केएल राहुल के शतक,ऋषभ पंत व जडेजा के अर्धशतकों की मदद से 387 रन बनाने में सफल रही लेकिन बढ़त लेने में असफल रही।जबकि एक समय लग रहा था कि भारत बढ़त लेकर मैच में आगे निकल जायेगा पर ऐसा हो न सका।जब तीसरे दिन के आखिरी सेशन में सिर्फ 6 मिनट का खेल होना था तब इंग्लैंड के ओपनर और भारतीय कप्तान के बीच बहस सोशल मीडिया पर ट्रेंड करती रही।खेल के चौथे दिन भारतीय गेंदबाजों ने कसी गेंदबाजी की और सुंदर ने अपने करियर का उत्कृष्ट स्पेल डाला जिससे इंग्लैंड की पूरी टीम 193 रन पर आल आउट हो गई।चौथे दिन के आखिरी सत्र में भारतीय सलामी जोड़ी मैदान पर थी और चार साल बाद टेस्ट मैच खेल रहे आर्चर के हाथ में गेंद।आर्चर ने इस मैच में अपनी गेंदबाजी से भारतीय टीम की उम्मीदों को पहले ही ओवर में झटका दिया जब एक शॉर्ट पिच गेंद पर तेजस्वी अपना विकेट खो बैठे।इसके बाद इंग्लैंड की टीम ने सधी गेंदबाजी की और भारत के बल्लेबाज डिफेंसिव क्रिकेट खेलते रहे जिससे चौथे दिन के खेल खत्म होने ...

ड्यूक गेंद

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  निकेश दिल्ली में रहते है,लेकिन उनका क्रिकेट मन आजमगढ़ में रहता है।इसलिए मुखर्जी नगर में यदा कदा क्रिकेट खेल लेते है।पर विपक्षी टीम उनके गेंदबाजी से भय खाती है वो उनको खेलते देख खुश नहीं होते हैं।कल भारत व इंग्लैंड के बीच लार्ड्स पर मैच हो रहा था तो निकेश बुमराह को देख के अपनी गेंदबाजी की प्रैक्टिस कर रहे थे।साथ ही साथ वो ड्यूक गेंद के शेप के बिगड़ने को भी समझा रहे थे।और इस सीरीज में ड्यूक के गेंद को लेकर खूब चर्चा हुई है....ड्यूक गेंद की कहानी क्या है? भारत और इंग्लैंड के बीच चल रहे टेस्ट मैच में बल्लेबाजों के शतक के बाद कोई सुर्खियों में आया तो ड्यूक गेंद।अमूमन टेस्ट मैच कूकाबूरा की गेंद से होती है लेकिन इंग्लैंड में ड्यूक से ही मैच खेले जाते है।जो शुरू के ओवर में शेप में रहती है और बाद में शेप बिगड़ने के बाद इससे गेंदबाजी करना कठिन हो जाता।लार्ड्स टेस्ट से पहले ऋषभ पंत से जब ड्यूक गेंद के ऊपर प्रश्न पूछा गया तो पंत का जवाब कुछ यूं था"जब गेंद सॉफ्ट हो जाती है तो ये ज्यादा कुछ नहीं करती।लेकिन गेंद बदलने के बाद फिर से स्विंग करने लगती है तब खेलना मुश्किल होता है।एक बल्लेबाज़ के त...