अंधेरे में
अंधेरे में स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से दीपिका पादुकोण को मेंटल हेल्थ पर बोलते हुए पहली बार सुना था।तब साल 2017 का था।उसके बाद से भारत में अलग अलग सेलिब्रेटी ने मेंटल हेल्थ के मुद्दे पर बोलना शुरू किया।तब मानस का परिष्कार नहीं हुआ था।आम लोगों की तरह मुझे भी यही लगता था कि मेंटल हेल्थ के नाम पर अपनी कमजोर को छुपाया जा रहा है।लेकिन विश्वविद्यालय में पठन पाठन से मानस का परिष्कार हुआ। और लोगों से इस विषय पर बातचीत हुई।तब जाकर इस विषय की गंभीरता समझ आई।बीते दिनों बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में इसी विषय पर एक नाटक देखने पहुंचा।नाटक का नाम 'अंधेरे' में था।पहली बार मुझे लगा कि नाटक मुक्तिबोध की कविता अंधेरे में को एडॉप्ट करके तैयार किया गया है।इसलिए हाल में पहुंचने के बाद मुक्तिबोध की कविता पढ़ता रहा।लंबी कविता थी और एंकर की तरफ से अनाउंसमेंट हो रहा था कि नाटक वीसी साहब के थोड़ी देर में पहुंचने के बाद शुरू होगा।तब तक अंधेरे हाल में अंधेरे में कविता पढ़ता रहा।इसलिए की नाटक समझ आए क्योंकि हिन्दी में ऐसी धारणा है कि मुक्तिबोध की कविता कठिन है।उनकी कविता आसानी से...