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हाथ को आया मुंह को न लगा

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  भारत व इंग्लैंड के बीच तीसरा टेस्ट लार्ड्स में था,जहां इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 387 रन बनाएं।वहीं इसके जवाब में भारत ने केएल राहुल के शतक,ऋषभ पंत व जडेजा के अर्धशतकों की मदद से 387 रन बनाने में सफल रही लेकिन बढ़त लेने में असफल रही।जबकि एक समय लग रहा था कि भारत बढ़त लेकर मैच में आगे निकल जायेगा पर ऐसा हो न सका।जब तीसरे दिन के आखिरी सेशन में सिर्फ 6 मिनट का खेल होना था तब इंग्लैंड के ओपनर और भारतीय कप्तान के बीच बहस सोशल मीडिया पर ट्रेंड करती रही।खेल के चौथे दिन भारतीय गेंदबाजों ने कसी गेंदबाजी की और सुंदर ने अपने करियर का उत्कृष्ट स्पेल डाला जिससे इंग्लैंड की पूरी टीम 193 रन पर आल आउट हो गई।चौथे दिन के आखिरी सत्र में भारतीय सलामी जोड़ी मैदान पर थी और चार साल बाद टेस्ट मैच खेल रहे आर्चर के हाथ में गेंद।आर्चर ने इस मैच में अपनी गेंदबाजी से भारतीय टीम की उम्मीदों को पहले ही ओवर में झटका दिया जब एक शॉर्ट पिच गेंद पर तेजस्वी अपना विकेट खो बैठे।इसके बाद इंग्लैंड की टीम ने सधी गेंदबाजी की और भारत के बल्लेबाज डिफेंसिव क्रिकेट खेलते रहे जिससे चौथे दिन के खेल खत्म होने ...

ड्यूक गेंद

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  निकेश दिल्ली में रहते है,लेकिन उनका क्रिकेट मन आजमगढ़ में रहता है।इसलिए मुखर्जी नगर में यदा कदा क्रिकेट खेल लेते है।पर विपक्षी टीम उनके गेंदबाजी से भय खाती है वो उनको खेलते देख खुश नहीं होते हैं।कल भारत व इंग्लैंड के बीच लार्ड्स पर मैच हो रहा था तो निकेश बुमराह को देख के अपनी गेंदबाजी की प्रैक्टिस कर रहे थे।साथ ही साथ वो ड्यूक गेंद के शेप के बिगड़ने को भी समझा रहे थे।और इस सीरीज में ड्यूक के गेंद को लेकर खूब चर्चा हुई है....ड्यूक गेंद की कहानी क्या है? भारत और इंग्लैंड के बीच चल रहे टेस्ट मैच में बल्लेबाजों के शतक के बाद कोई सुर्खियों में आया तो ड्यूक गेंद।अमूमन टेस्ट मैच कूकाबूरा की गेंद से होती है लेकिन इंग्लैंड में ड्यूक से ही मैच खेले जाते है।जो शुरू के ओवर में शेप में रहती है और बाद में शेप बिगड़ने के बाद इससे गेंदबाजी करना कठिन हो जाता।लार्ड्स टेस्ट से पहले ऋषभ पंत से जब ड्यूक गेंद के ऊपर प्रश्न पूछा गया तो पंत का जवाब कुछ यूं था"जब गेंद सॉफ्ट हो जाती है तो ये ज्यादा कुछ नहीं करती।लेकिन गेंद बदलने के बाद फिर से स्विंग करने लगती है तब खेलना मुश्किल होता है।एक बल्लेबाज़ के त...

शुभमन गिल

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  साल 1990 का था पंजाब में के पी एस गिल एसपी हुआ करते थे।उनका स्लोगन था मारूंगा भी और रोने भी नहीं दूंगा।पंजाब तब उग्रवाद की जड़ में था।लेकिन यहां भी बात पंजाब से जुड़ी है, पाकिस्तान की सीमा से सटा एक जिला है फाजिल्का जिसमें एक गांव है जैमल वाला जहां अपने पिता के फॉर्म हाउस में एक लड़का दिन भर प्रैक्टिस करता।उसके दोस्त जब खेलते तो उनको डांट पड़ती पढ़ाई के लिए लेकिन उसके साथ ऐसा नहीं था।बचपन के ही साथी रहे मयंक मारकंडे के साथ फीफा गेम खेलता जो मन में आता वो खाता लेकिन जिम में सबसे पहले पहुंचता।कप्तान बनने की उसकी इच्छा नहीं थी ,अंडर 19 में कप्तानी कर सकता था लेकिन छोड़ दिया।उसने शॉर्ट आर्म जैब से अलग ही छाप छोड़ी ,लोग उसे प्रिंस कहते हैं, कमेंट्री करने वाले प्रिंस से किंग की ओर अग्रसर बताते हैं।पर शतक के बाद वो सात्विक मुस्कान साधे रहता है .... यह कहानी भारतीय टेस्ट के युवा कप्तान शुभमन गिल की जिन्हें न सिर्फ कप्तानी से बल्कि बल्लेबाजी से भी एक बड़े वैक्यूम को भरना है जो एक ही समय में दो दिग्गज भारतीय बल्लेबाज रोहित शर्मा व विराट कोहली के टेस्ट से संन्यास लेने के बाद खाली हुआ है।आगे...