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हरिजन सेवक संघ

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  पिछले साल प्रधानमंत्री ने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा से पहले नासिक के कालाराम मंदिर का दर्शन किया।कालाराम मंदिर कई मायनों में महत्त्वपूर्ण है,एक भगवान राम ने माता सीता व लक्ष्मण के साथ अपने 14 वर्ष के वनवास के शुरुआती दिन इसी दण्डकारण्य क्षेत्र में बिताए,जो पंचवटी के नाम से विख्यात है और गोदावरी नदी के किनारे है।वहीं दूसरी महत्त्वपूर्ण घटना 1930 की है जिसमें अम्बेडकर व मराठी शिक्षक व सामाजिक कार्यकर्ता सदाशिव साने जो साने गुरुजी के नाम से जाने जाते है।दलितों के मंदिर प्रवेश के लिए सत्याग्रह किया।प्रदर्शनकारियों को विरोध का सामना करना पड़ा और जब उन्होंने रामनवमी के जुलूस को  मंदिर परिसर में प्रवेश करने से रोकने का प्रयास किया तो पत्थरबाजी की घटना हुई,बाद में अम्बेडकर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया।वहीं नासिक से तीन सौ किमी दूर महात्मा गांधी ऐतिहासिक दांडी यात्रा की शुरुआत कर रहें थे।जिसकी अंग्रेजी समाचार ने यह कहते हुए खिल्ली उड़ाई कि "क्या सम्राट को एक केतली के पानी उबालने से हराया जा सकता है?"जिसके जवाब में गांधी जी ने कहा कि गांधी "महोदय समुद्री जल को तब तक उबा...

दिल्ली दरबार

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साल 1876 का था,भारत के वायसराय लॉर्ड लिटन (1876- 1880)थे।जो एक विख्यात कवि,उपन्यासकार व निबंध लेखक थे जिन्हें साहित्य जगत में ओवनमैरिडिथ  (OwenMeredith) के नाम से जाना जाता था।इन्हीं के शासन में एक भीषण अकाल आया था जिससे मद्रास,बंबई ,मैसूर ,हैदराबाद ,मध्यभारत के कुछ भाग व पंजाब प्रभावित हुए थे।इसी के बाद 1880 में लॉर्ड स्ट्रैची के नेतृत्व में एक अकाल आयोग का गठन किया गया था।जिससे अकाल के दिनों में दी जाने वाली सहायता पर विचार हो सके।वहीं साल1876 में ' प्रिंस ऑफ वेल्स 'दिल्ली पहुंचे और उसी साल शाही सभाआयोजित होनी थी जिसमें विक्टोरिया को भारत की शाही साम्राज्ञी की उपाधि दी जाने की घोषणा थी।प्रिंस ऑफ वेल्स के आगमन पर भारतेंदु हरिश्चंद्र ने कविता भी लिखी है -                    आओ आओ हे जुवराज।          धन-धन भाग हमारे जागे पूरेसब मन-काज॥       कहँ हम कहँ तुम कहँ यह दिन कहँ यह सुभ संजोग।       कहँ हतभाग भूमि भारत की कहँ तुम-से नृप लोगा॥ इसी समय लॉर्ड लिटन की दिल्ली में स...