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बास्केटबॉल का गणित

एक जमाने में DVD का क्रेज हुआ करता था।उसमें फिल्मों का कैसेट लगता और टीवी पर फिल्में चलती।पर फिल्म आज की तरह जब मन किया ओटीटी खोला देख लिया ऐसा नहीं था।तब किसी के बियाह या बारात का इंतजार करना होता था।क्योंकि बारात आती तो उसमें पर्दे पर फिल्म चलती या आर्केस्टा का डांस होता।पर्दे पर फिल्म देखने के लिए तो कभी परमिशन मिल भी जाती लेकिन आर्केस्टा के लिए कभी नहीं ऐसा होता।वो समय शील का था।अब वो बचा नहीं क्योंकि आज आप किसी को रोक नहीं सकते।दूसरी तरफ फिल्म देखने का एक समय सरस्वती पूजा के समय होता था।उस समय जहां जहां सरस्वती जी की मूर्ति होती वहां पर्दे पर या टीवी पर फिल्म जरूर चलती थी।एक दफा मेरे अपने मोहल्ले में सरस्वती की मूर्ति रखी गई।सबका विचार बना कि उधार पर टीवी व डीवीडी लाया जाए।यहां भी रात में फिल्म चलेगी।यह सब तय हो गया तो पेंच फंस गया कौन सी फिल्म चलेगी?हम ने कहा कि कोई मिल गया चलाइए।खूब आनंद भी आएगा और हर कोई देख भी सकता है।फिल्म की  कहानी एक कम आइक्यू वाले लड़के और एलियन के जादू से आए परिवर्तन पर थी।जिसमें एक सीन बास्केटबॉल का भी है।जिसमें बास्केटबॉल का मैच होता है।एक तरफ फिल्म...