बाढ़ किसी के लिए राहत किसी के लिए मुसीबत
गांव के उत्तरी छोर पर दाखिल होने पर एक अधकचरा खड़ंजा है।जिसके दोनों तरफ खेतों का एक बड़ा चक हैं।कुछ खेतों में पानी भरा है।जबकि एकाद खेत में पानी के
ऊपर धान की फसल दिखती है।जो बाढ़ के पानी से बदरंग हो गई है।उसका हरा रंग उड़ गया है।खड़ंजे से आगे बढ़ने पर एक बगीचा है जिसमें एक पोल के ऊपर कुछ लोग बैठे हैं।ये वही लोग हैं जिनके खेतों में बाढ़ का पानी घुस गया था।वो अपनी खेती व बाढ़ से हुए नुकसान पर बातचीत करते हैं।वहीं मझौले किस्म के किसान पीयूष राय बातचीत में कहते है कि पिछली बार तो कुछ खाने और बेचने का इंतजाम हो गया था।लेकिन इस बार जिस दिन रोपाई हुई उसके अगले ही दिन पानी भर गया।एक खेत में तो बीज रखा गया था वो बिना रोपे ही बह गया।उन्हीं के बगल में लिटिल राय जो पूरी तैयारी कर रहे थे कि उनका खेत रोप दिया जाए,लेकिन बाढ़ के पानी को देखकर वो पीछे हट गए।अब पानी उतर गया है तो फिर से तैयारी कर रहें है।वहीं ताल के नीचे की तरफ पारस राय का खेत है कहते है कि पानी उतर तो गया है लेकिन तीन बार बढ़ता घटता है।अभी तो एक बार ही पानी बढ़ा है।जगह जगह बादल फट रहें है तो पानी एक बार आयेगा तो जरूर पर पानी जिन खेतों से निकल गया है।उसमें खाद डालकर उसे बड़ा कर लेना चाहते है ताकि अगली बार पानी बढ़े तो उसके होने की उम्मीद बची रही।
गांव के ही पूर्वी छोर पर जहां ताल का मुख्य पाट है और उसी के बीच एक सड़क है जो गांव को दूसरे गांव से जोड़ती है।उसी सड़क पर शाम को टहलने के लिए मुंशी जी मिले जो बाढ़ को हितकर बता रहे थे।उनका कहना था कि लोगों को पानी से हुआ नुकसान दिख रहा है ।लेकिन उसके आने से कुछ फायदा भी है।मिट्टी नई आ जाएगी तो मोटंजा के लिए फायदा रहेगा।वहीं हमारे बिरादरी वालों के हक में अच्छा है कुछ दिन घोंघा ,मछली खाने को मिलजायेगा।इसी सड़क पर वापसी में पुलिया पर बैठे लोहा मिले जो पुलिया पर ठंडी हवा खाने आए थे।पुलिया के दूसरे छोर पर लोग वंशी से मछली मार रहे हैं।उनका कहना था कि जहां तक पानी दिख रहा है उसके किनारे किनारे सब के ही दो चार मंडा खेत डूबे हैं।और ये पानी अभी उतरा है लेकिन एक बार अभी बढ़ेगा जरूर।बातचीत में उनसे पूछा कि बाढ़ के आने से फायदा तो है नई मिट्टी आती है तो मोटा अनाज खूब होता होगा।उनका मानना था कि नहीं मोटा अनाज के बोने के समय तक पानी निकल ही नहीं पाता,पानी जब निकल जाता है तो लोग गेहूं छींट देते हैं।जिसका सघन फैलाव तो खूब होता है लेकिन बालियों से अनाज झरता ही नहीं।यही नहीं मजाक में वो कहते है इस ताल में नहर निकली ही नहीं होती लेकिन लोग खेती करते थे और सरकार कोमालगुजारी नहीं देते थे।इसलिए सरकार ने यहां से तीन चार नहरें निकाल दिया।यही नहीं इस पुलिया से सीधा 200मीटर की दूरी पर आठ बीघे का खेत सपा से विधायक ओमप्रकाश सिंह का भी है जो जलमग्न है।ये गांव भी वैसे ही जलमग्न रहता था।दूसरे गांव से संपर्क इधर से कट जाता था।लेकिनविधायक जी ने यहां मिट्टी पटवा के एक सड़क निकाल दी है जिससे जीवन पहले से सुगम हुआ है।सड़क के बनने से जैसे जीवन सुगम हुआ है वैसे बाढ़ के आने से भी होता है उसका दायरा सीमित हो सकता है।बाढ़ से पहले लोगों के हैंडपंप से पानी आना बंद हो गया था। महिलाओं को इससे खास दिक्कत होती थी,उनको दूर से पानी ढोकर लाना पड़ता था।उसमें बूढ़ी महिलाएं भी होती थी। लेकिन बाढ़ ने जैसे ही दस्तक दी है हैंडपंप से पानी आना शुरू हो गया है।।वहीं हर घर जल योजना का लाभ यहां अभी नहीं पहुंचा।गांव के कुछ गलियों को खोदकर उनमें पाइप डाला गया है पर उनमें पानी की धार नदारद है।यही नहीं गांव के बाहरी हिस्से में पानी टंकी का स्लैब खड़ा है लेकिन टंकी नहीं है।जबकि मंत्री जी विधानसभा में एक सदस्य के यही कहने पर कि उसके यहां पानी नहीं पहुंचा है बिफर जाते है।उनका कहना है कि तुम अपनी पत्नी की कसम खाओ।इसी गांव से आगे बढ़ने पर भी इसी तरह पानी की टंकी का स्लैब दिखा जो पानी के बीच में खड़ा है।
पर इन सबके बीच जब भी सरकार में शामिल लोगों से प्रश्न पूछा जाता है तो उनके जवाब हास्यास्पद होते हैं।वो जमीनी हकीक़त को नजरअंदाज कर बयानबाजी कर रहे होते है।संजय निषाद से जब किसी ने बाढ़ को लेकर प्रश्न पूछा तो उनका जवाब कुछ यूं था “गंगा मैया पुत्रों के पांव धुलने आती हैं।गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं और विरोधी लोग आपको उल्टा सीधा पढ़ाते हैं।सौभाग्य है सबका कि गंगा जी आ जाती है।गेहूं की फसल अच्छी होती है।भले ही तीन महीने परेशानी होती हो।”इस गांव के दो छोर पर जहां बाढ़ से नुकसान हुआ है वहीं दो छोर बाढ़ से बचे रहे लेकिन पुनः पानी बढ़ने पर उनके ऊपर भी खतरा है।फिलहाल तो लोग इस आशा में हैं कि सरकार से कुछ राहत राशि मिल जाए।लेखपाल आए और इन खेतों का लेखा जोखा करे।लेखपाल का इंतजार व बाढ़ का पानी पुनः न बढ़े इसी की बाट देखते हैं।जिनका थोड़ा सा हिस्सा बचा है,चाहते है बचा रह जाए ताकि भोजन भर धान हो जाए।
जमानियां तहसील
सोनहरियां गांव
उत्तर प्रदेश
Comments
Post a Comment