एंडरसन तेंदुलकर ट्राफी के मध्य मंसूर अली पटौदी

 भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट श्रृंखला चल रही है।इस श्रृंखला को पहले पटौदी ट्रॉफी के नाम से जाना जाता था।लेकिन इस दौरे पर इसका नाम बदलकर तेंदुलकर एंडरसन ट्रॉफी कर दिया गया है।ट्रॉफी के नाम बदलने पर पटौदी परिवार की प्रतिक्रिया भी आई।शर्मिला टैगोर ने कहा कि मुझे उनकी तरफ से कोई खबर नहीं मिली है, लेकिन ECB ने सैफ को एक पत्र भेजा है जिसमें कहा गया है कि वे ट्रॉफी को रिटायर कर रहे हैं। अगर BCCI टाइगर की विरासत को याद रखना चाहती है या नहीं रखना चाहती, तो यह उनका निर्णय है।"बाद में वो इस फैसले से दुःखी भी थी।वहीं दूसरी तरफ सचिन की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान तक नहीं आया जिससे उनके फैन्स को भी चौकाया।लेकिन सचिन तेंदुलकर ने स्काई स्पोर्ट्स से बातचीत में अपनी चुप्पी तोड़ी।स्काई स्पोर्ट्स से बातचीत में सचिन ने कहा कि मैंने पटौदी फैमिली से फोन पर बातचीत की और हम ने ये तय किया कि किसी तरह की उनकी लेगसी को बनाए रखा जाए।साथ ही साथ मैंने इसके लिए जय शाह ,Bcci व Ecb से भी बातचीत कि कुछ नया इंट्रड्यूस किया जाए जो पटौदी फैमिली में पहले कभी नहीं हुआ हो।ये हुआ भी जीतने वाले कप्तान को पटौदी मेडल ऑफ एक्सीलेंस से नवाजा जायेगा और मिस्टर पटौदी को अपने लीडरशिप के लिए ही जाना जाता है। 











पटौदी कौन थे?यह जानने के लिए हम ने गूगल किया।गूगल के उत्तर के अनुसार पटौदी हरियाणा के गुरुग्राम में एक तहसील का नाम है।लेकिन इसका इतिहास काफी पुराना है।

मेवाती सरदार पाटा ने इसकी स्थापना की थी।यह एक रियासत थी।जिसके आठवें नवाब इफ्तिखार अली खान पटौदी ने भारत व इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेला था।वो भारत के कप्तान भी रहे।इन्हीं के पुत्र पटौदी के नवें नवाब मंसूर अली खान पटौदी थे और भारतीय टीम के कप्तान भी 

रहे।

रेहान फ़जल बीबीसी एक कार्यक्रम में मंसूर अली पटौदी

को कुछ यूं याद करते है पटौदी से हैंडसम क्रिकेटर भारत में बहुत कम हुए।जब उन्होंने डेब्यू किया था और जब वो चलते थे।लोग उनको रुक कर देखा करते थे।कितने हसीन व स्मार्ट खिलाड़ी थे?भारतीय टीम की हैसियत उस समय कुछ खास नहीं थी आज के जिम्बाब्वे की तरह उसकी हालत थी।उन्होंने इस साधारण टीम में ये विश्वास पैदा किया कि वो जीत सकते है।उस समय बल्लेबाज तो अच्छे होते थे लेकिन फील्डिंग उनकी वैसी नहीं होती थी।पटौदी ने फील्डिंग को फैशन बनाया।


कप्तान कैसे बने 

रेहान फ़जल बताते है कि साल 1962 का था भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर थी।भारत के कप्तान नारी कांट्रेक्टर बारबाडोस के खिलाफ मैच में बल्लेबाजी कर रहे थे।गेंदबाजी उस समय के फास्टेस्ट गेंदबाज चार्ली ग्रिफिन कर रहे थे।उन्हीं के एक बीमर गेंद नारी कांट्रेक्टर के सर में लगी और उनके नाक व मुंह से खून बहने लगा।वहीं उनका इलाज हुआ और उनकी जान बची।इसी हादसे के बाद भारतीय टीम के मैनेजर गुलाम अली ने पटौदी से बातचीत की और कहा कि अगले कप्तान आप होंगे जबकि उस समय वो टीम में सबसे जूनियर खिलाड़ी थे।उस समय पटौदी 21 साल 70 दिन के थे।

साल 1964 का था इंग्लैंड की टीम भारत के दौरे पर आई।पांच मैचों की श्रृंखला थी।श्रृंखला के शुरू के तीन मैचों में  पटौदी बल्ले से कुछ खास नहीं कर पाए थे।लेकिन श्रृंखला के चौथे मैच में जो कि फिरोजशाह कोटला (अरूण जेटली स्टेडियम)के मैदान पर खेला गया उसमें पटौदी ने दूसरी पारी

में दोहरा शतक लगाकर अपनी टीम को खेल में आगे कर दिया था।आखिर में मैच ड्रॉ ही हुआ।यही नहीं इस श्रृंखला के पांचों मैच ड्रॉ पर ही समाप्त हुए।


साल 1966 का था , वेस्टइंडीज की टीम भारत के दौरे पर थी। ईडेन गार्डन में नए साल का पहला दिन जो कि रविवार का व क्रिकेट का दूसरा दिन था।रविवार का दिन मौज का दिन।उस दिन ईडन गार्डन में बाहर भीतर एक लाख लोग इकट्ठा हो गए। 55हजार सीटों के लिए 75हजार लोग इकट्ठा हो गए।जगह कम पड़ने लगी और छह रुपए के टिकटधारी अंदर घुसते ही जा रहे थे।इसके बाद जनता ने बगावत कर दी जिसे रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।क्रिकेट के मैदान में उस दिन एक खराब घटना घटी।उस दिन खेल को रोकना पड़ा।आगे भारतीय टीम कुछ खास कर

नहीं पाई और वेस्टइंडीज ने 2-0 से श्रृंखला अपने नाम की।

इस वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम में गैरी सोबर्स थे जिनके एक रिकॉर्ड की बराबरी ने जडेजा इंग्लैंड के खिलाफ छठी हाफ सेंचुरी लगाकर की।


इसके बाद साल आया 1967 का जब भारतीय टीम इंग्लैंड के दौरे पर गई।तीन मैचों की श्रृंखला थी।जिसमें पहला मैच हेडिंगली में खेला जाना था।इस मैच के दोनों ही पारियों में पटौदी ने बेहतरीन पारी खेली बल्कि दूसरी पारी में 148 रन की बहुमूल्य पारी खेली ।उसके बावजूद भी इंग्लैंड की टीम

ने 6 विकेट से इस मैच को जीता।इस मैच की रिपोर्टिंग दिनमान पत्रिका में उस समय कुछ यूं छपी थी 



लीड्स में खेले गये पहले टेस्ट में शान से हारने के बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का मैच जीत जाना भारतीय टीम के लिए एक शुभ लक्षण ही माना जा सकता है। दूसरा टेस्ट शुरू होने में अब ज्यादा देर नहीं है। भारतीय टीम के कप्तान मंसूर अली खाँ दूसरे टेस्ट की तैयारी में जुट गये हैं और अब वह ऐसी कोई भूल नहीं करना चाहते जैसे कि उन्होंने या कि उन की टीम के अन्य सदस्यों ने पहले टेस्ट मैच में की हैं।


कप्तान पुरस्कृत : पहला टेस्ट खत्म हो जाने के बाद कप्तान पटौदी को सर्वश्रेष्ठ भारतीय बल्लेबाज के रूप में १०० पौंड का हालिक्स पुरस्कार प्राप्त हुआ। विकेट कीपर इंजीनियर को क्षेत्ररक्षण का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया और उसे ५० पौंड का पुरस्कार दिया गया। उधर इंग्लैंड के केन बैरिंगटन को भी वही पुरस्कार प्राप्त हुआ जो भारतीय कप्तान पटौदी को हुआ। इंग्लैंड के इलिंगवर्थ को इंग्लैंड का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज मान कर पुरस्कृत किया गया।


लार्ड्स में शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट में भाग लेने वाले इंग्लैंड के खिलाड़ियों के नामों की घोषणा कर दी गयी है। इंग्लैंड के मशहूर बल्लेबाज खिलाड़ी बायकाट को, जिन्होंने पहले टेस्ट की पहली पारी में २४६ रन बनाये थे और अन्त तक आउट नहीं हुए थे, टीम में शामिल नहीं किया गया। उन पर अनुशासन भंग करने का आरोप लगाया गया। दो वर्ष पूर्व वैरिंगटन को भी एक टेस्ट के लिए निकाल दिया गया था। इस लिए लोगों का अनुमान है। कि बायकाट को भी केवल एक टेस्ट के लिए ही टीम से बाहर किया गया है और तीसरे टेस्ट में शायद उन्हें टीम में शामिल कर लिया जायेगा। इस के अतिरिक्त इंग्लैंड के मध्यम तेज गेंदन्दाज केन हिम्स को भी टीम में शामिल नहीं किया गया है। दूसरे टेस्ट में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के नाम इस प्रकार हैं ब्रायन क्लोज (कप्तान), डेनिस एमिस, वैरिंगटन, डेविड ब्राउन, डी. ओलिवेरा, एडरिच, टाम ग्रेवेनी, होल्स, इलिंगवर्थ, टी. मरे, जे. ए. स्नो और केन फ्लेचर (बारहवाँ खिलाड़ी)।


श्रृंखला का अगला मैच क्रिकेट के मक्का में होना था।जहां भारत ने अपना पहला मैच 25 जून 1932 को खेला था।सी के नायडू से कप्तान नवाब पटौदी तक 98 मैचों में

14 भारतीय कप्तान नेतृत्व कर चुके हैं।लेकिन इन मैचों में भारतीय टीम सिर्फ 10 मैच जीती है जबकि 50 ड्रॉ व 38 मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा।लार्ड्स के दूसरे मैच

में भारतीय टीम का प्रदर्शन निराशाजनक ही रहा है।पहली पारी में जहां भारतीय टीम 152 तो दूसरी पारी में 110 रन पर ढेर हो गई।इंग्लैंड ने पहली पारी में 386 रन बनाए थे और 124 रन से इस मैच को जीत गया।लेकिन इस मैच में भारतीय टीम की हार से ज्यादा नवाब पटौदी की मंगेतर शर्मिला की मैच में उपस्थिति से ज्यादा चर्चा चली।दिनमान में कुछ यूं ख़बर छपी "कप्तान पटौदी की मंगेतर शर्मिला टैगोर कप्तान पटौदी का हौसला बढ़ाने के लिए इंग्लैंड तो पहुंची जरूर थी ,मगर लगता है कि कप्तान ने उनसे प्रेरणा कम ली और प्रेमालाप अधिक किया।"


वहीं इस सीरीज में लार्ड्स के मैदान पर भारतीय टीम ने जीवटता का खेल दिखाया।पहली पारी में भारत बढ़त से दूर रहा। वहीं दूसरी पारी में जडेजा,बुमराह व सिराज की पारियों ने जीत की उम्मीद बांधी लेकिन 22 गज की पिच पर भारत 22 रन से मात खा गया।मैच के खत्म होने के बाद गिल ने भारत की बढ़त व पंत के रन आउट को गेम चेंजिंग मोमेंट बताया।



आज जब भारतीय टीम इंग्लैंड के दौरे पर है और टीम का कप्तान पटौदी की ही तरह युवा है जो अभी 25 साल का है।जिसका पहला ही दौरा विदेश का है और जहां दो बड़े स्टार खिलाड़ी(रोहित कोहली) पहले ही संन्यास ले चुके हैं।ऐसे में एक यंग टीम के साथ इंग्लैंड में क्रिकेट खेलना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है।वहीं क्रिकेट के पंडित पहले ही आपके प्रदर्शन पर सवाल खड़ा कर चुके हो?ऐसे में सीरीज के आखिरी मैच में जिस जीवटता से भारतीय टीम ने प्रदर्शन किया और सीरीज को 2-2 की बराबरी पर समाप्त किया।जिसमें गिल ने जहां बल्ले से रनों(754रन) का अंबार खड़ा किया व गावस्कर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।वहीं सिराज ने जिस दमखम के साथ गेंदबाजी की और सीरिज में सर्वाधिक 23 विकेट भी हासिल किया और भारत की जीत में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की।नेतृत्व को लेकर कभी सर डॉन ब्रैडमैन ने कहा था "क्रिकेट में वह कप्तान कुशल व श्रेष्ठ है ,जो खेल के प्रति समर्पित हो,जिसमें संघर्ष करने की क्षमता हो,जो आत्मविश्वास से के साथ तर्कों को सहने की क्षमता रखता हो।"गिल ने इस सीरीज में अपने नेतृत्व में वो सभी गुण एक्प्रेस भी किया।सीरीज के बराबर होने से पटौदी एक्सीलेंस मेडल अवॉर्ड किसी को प्रदान नहीं किया गया ।लेकिन गिल के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट की लेगसी ऐसे ही आगे बढ़ती रहे।


Comments

Popular posts from this blog

दिल्ली दरबार

सादगी सार्वभौमिकता का सार है -गांधी

मदन काशी