बिहार विधानसभा

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आ गए है।राजग को इस तरह के परिणाम की भी आशा नहीं रही होगी।वहीं महागठबंधन जो चुनाव से पहले ही शपथ की तैयारी कर रहा था उसे अब इस परिणाम के शपथ पर मंथन की जरूरत है।दूसरी तरफ चुनाव से पहले जनसुराज व प्रशांत किशोर के दावे की जमीनी हकीकत पर जो परिणाम आया वह भी कम आश्चर्यचकित नहीं करता।जहां चुनाव से पहले उनके ऊपर एक्स फैक्टर के लेख आते थे।अब उनके राजनीतिक अंत तक की बात लिखी जा रही है।लेकिन यह कहने में कोई गुरेज नहीं कर सकता कि उन्होंने बिहार में जनता के मुद्दे को उठाया और एक नैरेटिव तैयार किया।पर बिहार की राजनीति में मुद्दों से ज्यादा मास लीडर व जाति की चर्चा न आए।ये हो नहीं सकता Caste has served since Independence both as an instrument of political democratic India, castes—as a social unit—have always been perceived as a strong vehicle of improving access to power and promotion of interests and it continues to matter. Increased political significance of castes has provided them a greater social hold. Democracy, industrialisation and an equitable economic redistribution have softened their edges but have not eroded their bases. In fact, they have provided an added economic dimension on mobilization and as a constraint on inclusive governance,” wrote Rajkishor in his ‘Understanding the Politics of Bihar’ (Indian History Congress journal, 2016).

और वो नैरेटिव किसी भी विकास के मुद्दे पर भारी है।इसे आजकल सोशल इंजीनियरिंग कहा जाता है और हर पार्टी अपने स्तर पर इसका प्रयोग करती है।दूसरी तरफ इस समय राजनीति में लोकलुभावन वादों की खूब चर्चा होती जिसे दूसरे शब्दों में फ्री बीज कहा जाता है।कई लोग इसकी मुख्लाफत भी करते है जबकि कई इसके विरोध में भी रहते है।आज तो यह कह जा रहा है कि न्यूयार्क में जोहरान मोमदानी ने जो चुनाव जीता उसके पीछे भी लोकलुभावन वादों की झड़ी ही है।जिसे राजनीति के जानकार populist कहते है...


राजनीति में समय की भी खूब बात होती है।इसी चुनाव में बात हो रही है।नीतिश कुमार ने कैसे आखिरी समय पर दस हजारी स्कीम लाए जिससे पूरा चुनाव ही पलट गया।यही थोड़ा पीछे जाए तो साल 2015 का था।मोहन भागवत ने आरक्षण के बारे में एक बयान दिया था। पीके उस समय नीतीश के लिए इलेक्शन देख रहे थे।उस पूरे चुनाव में यह मुद्दा बना।नीतिश की दमदार वापसी हुई ।भाजपा चारों खाने चित्त हुई।उस वक्त खुद नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण को सामने से देखने का अवसर आया।जहां तेज प्रताप यादव को राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने अपेक्षित और उपेक्षित पर टोक कर पूरी शपथ फिर से पढ़वाई थी।जिसके वीडियो आज भी शेयर किए जाते है।पीके को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था।जनता दल का पर्याय ही पीके हो गए थे।अब वही पीके है जो चुनाव से पहले कह रहे थे कि नीतीश कुमार इस बार सत्ता से बाहर हो रहे है।वो 25 सीटों पर सिमट जायेंगे।जनसुराज या तो अर्श पर होगी या फर्श पर .......

इसके अलावा बिहार विधानसभा में यह पहला मौका होगा जब मात्र दस मुस्लिम ही विधानसभा में उपस्थित होंगे।बिहार के कास्ट्स सर्वे में 17.7 % मुस्लिम है।इसी मुस्लिम आबादी पर राजद दावा करती रही है।जिसे MY समीकरण कहा जाता है।साल 2010 में जहां 19 मुस्लिम ,2015 में 24
वहीं 2020 में 19 मुस्लिम विधानसभा पहुंचे थे।पर इन सबके बीच एक सीट रघुनाथपुर जिस पर मेरी नजर थी।यहां से मकबूल बाहुबली शाहबुद्दीन के पुत्र ओसामा शहाब
ने 9248 वोटों से जीत दर्ज की।यहीं से पीछे लौटते है।
साल 1997 में जेएनयू के अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद बिहार पहुंचे।वह सीपीई एमएल के नेता थे।उसी साल जयप्रकाश नारायण की मूर्ति के सामने चंद्रशेखर प्रसाद और उनके एक दोस्त को गोलियों से छ्लनी कर दिया गया ।इस कांड में जिसका अप्रत्यक्ष रूप से नाम आया वो शाहबुद्दीन का था।जेएनयू से लेकर मार्क्सिस्ट पार्टी ने शाहबुद्दीन पर करवाई करने के लिए आंदोलन किया।लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।इस बार के चुनाव में RJD पार्टी में मार्क्सिस्ट पार्टी गठबंधन में थी.....

 बिहार की अब तक की सबसे युवा प्रत्याशी मैथिली ठाकुर जो 25 साल में बिहार विधानसभा पहुंच गई।यह भी अपने आप में अनूठा है कि सोशल मीडिया के दौर में वायरल होना और उसके बाद यहां तक पहुंचना अपने आप में उपलब्धि है.... इसके अलावा और बातें फिर कभी




 

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