लोहिया ने महिलाओं के संबंध में क्यों कहा था हिंदुस्तान का दिमाग सड़ा गला है
पिछले दिनों प्रेमानंद महाराज का एक बयान खूब वायरल हुआ।उनके बयान के बाद बहुत सारी प्रतिक्रियाएं भी आई।
कुछ लोग उनके बयान से सहमति भी जता रहे थे वहीं कुछ लोग आधुनिक समाज में संत के इस बयान पर नाराज भी दिखे।ऐसे में सवाल उठता है प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा?
दरअसल अपने भक्तों के सवाल के जवाब में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आजकल बच्चों और बच्चियों के चरित्र पवित्र नहीं है तो अच्छे कैसे आएंगे।हमारी सारी माताओं बहनों के पहले रहन-सहन देखो।हम अपने गांव की बात बता रहे हैं। बूढ़ी थी पर इतने से नीचे इतना घूंघट रखती थीं।आज बच्चे बच्चियां कैसी पोशाकें पहन रहे हैं ?कैसे आचरण कर रहे हैं? एक लड़के से ब्रेकअप दूसरे से व्यवहार फिर दूसरे से ब्रेकअप फिर तीसरे से व्यवहार और व्यवहार व्यभचार में परिवर्तित हो रहा है।कैसे शुद्ध होगा? मान लो हमें चार होटल के भोजन खाने की जबान में आदत पड़ गई है तो घर की रसोई का भोजन अच्छा नहीं लगेगा। जब चार पुरुष से मिलने की आदत पड़ गई है तो एक पति को स्वीकार करने की हिम्मत उसमें नहीं रह जाएगी। ऐसे ही लड़का जब चार लड़कियों से व्यभिचार करता है तो वो अपनी पत्नी से संतुष्ट नहीं रहेगा।उसे चार से व्यभिचार करना पड़ेगा क्योंकि उसने आदत बना ली है।हमारी आदतें खराब हो रही है।
ये वायरल क्लिप का एक हिस्सा था जिसके वायरल होने के बाद लोगों ने पूरा वीडियो साझा किया जिसमें प्रेमानंद महाराज न सिर्फ स्त्रियों बल्कि पुरुषों के लिए भी ऐसी ही बातें कही।लेकिन ये कोई पहला मामला नहीं है जब स्त्रियों को लेकर ऐसी बातें कही गई हो।इससे पहले अनिरुद्धाचार्य ने भी स्त्रियों के शादी को लेकर गैर जिम्मेदाराना बयान। दिया था।इस तरह के बयान सिर्फ संतों के ही नहीं बल्कि भारतीय संसद के भीतर तो कम लेकिन बाहर ऐसे बयानों की एक लंबी फेहरिस्त है।अभी जुम्मा जुम्मा कुछ दिन हुए होंगे संसद के मानसून सत्र को शुरु हुए।इसी समय अखिलेश और उनके पार्टी के सांसदों ने संसद भवन के नजदीक एक मस्जिद में बैठक की जैसा दावा किया गया।इस बैठक में इकरा हसन व डिंपल यादव भी मौजूद थी।इसके बाद एक टीवी डिबेट में मौलाना ने सपा से सांसद डिंपल यादव के कपड़े पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया और डिंपल को नंगी बता डाला।जिसके बाद भाजपा के सांसदों ने संसद के बाहर इस बयान का विरोध किया।वहीं भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दकी ने कहा कि संसद भवन के बगल में स्थित मस्जिद में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव जिस तरह का पहनावा पहनकर गई थीं, उस तरह के पहनावे में महिलाएं मस्जिद में नहीं जा सकती हैं।
भारत में महिलाओं की चिंता करने वाला समाज किस प्रकार
महिलाओं को देख रहा है?ये कोई नया विषय भी नहीं है लेकिन लोहिया ने भारतीय नारी के प्रश्न पर गहराई से विचार किया है।योनि शुचिता और नर नारी सम्बन्ध में लोहिया ने लिखते है हिंदुस्तान आज विकृत हो गया है,यौन पवित्रता की
लम्बी चौड़ी बातों के बावजूद आम तौर पर विवाह और यौन के संबंध में लोगों के विचार सड़े हुए हैं।सारे संसार में कभी कभी मर्द ने नारी के सम्बन्ध में शुचिता, शुद्धता,पवित्रता के बड़े लम्बे चौड़े आदर्श बनाए हैं।घूम फिर कर इन आदर्शों का सम्बन्ध शरीर तक सिमट जाता है और शरीर के भी छोटे हिस्से पर।आगे लोहिया ने भारत के जनमानस के सामने एक प्रश्न रखा है जिसका उत्तर बड़ा साफ है।पर हम उसे अपने हिसाब से इस्तेमाल करते है।प्रश्न है हिंदुस्तान की प्रतीक नारी कौन?द्रौपदी या सावित्री ?इस प्रश्न में लोहिया कहते है कि बहुत संभव है कि ये दोनों औरतें काल्पनिक हैं।यह भी हो सकता है कि हुई हों।ऐसा भी हो सकता है कि किसी एक रूप में हुईं,लेकिन समय जैसे जैसे बढ़ता गया वैसे वैसे किस्से उनके साथ जुड़ते गए।
आज भी द्रौपदी की उपमा से स्त्रियों पर कटाक्ष होते हैं।सावित्री पर भी होते होंगे लेकिन दूसरे संदर्भों में।यह आम महिलाओं की ही नहीं भारत के राष्ट्रपति जो खुद एक महिला है और जिनका नाम द्रौपदी मुर्मू है उन पर भी बयान बाजी हो चुकी है।उनके संदर्भ अलग रहे होंगे।वहीं लोहिया लिखते है आज के हिंदुस्तान में द्रौपदी की उसी विष्टिता को मर्द और औरत ज्यादा याद रखे हुए हैं कि उसके पांच पति थे।द्रौपदी की जो खास बातें हैं,उनकी तरफ ध्यान नहीं जाता।यह आज के सड़े -गले हिन्दुस्तान के दिमाग की पहचान है कि इस तरह के सवाल पर दिमाग बड़ी जल्दी चला जाता है कि किस औरत के कितने पति या प्रेमी हैं या इस अंग में वह किस तरह से चरित्रवादी रही है,और दूसरी बातों की तरफ ध्यान नहीं जाता।
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