बंगाल में काली पूजा



पिछले दिनों अपने सीनियर के साथ बनारस में लक्सा स्थित रामकृष्ण आश्रम में दुर्गा पूजा में शामिल होने का योग बना।यहां दुर्गा की विधि विधान से पूजा तो देखा ही साथ साथ बंगाल की संस्कृति को करीब से समझने का अवसर भी रहा।यही नहीं कुछ नई बातें भी पता चली जिसमें शरद पूर्णिमा के दिन यहां लक्ष्मी पूजा मनाई जाती है।जबकि उत्तर भारत में लक्ष्मी पूजा अमावस्या के दिन होती है।वहीं उत्तर भारत में जब दीपावली मनाई जाती है तो बंगाल अपितु असम में काली पूजा की होती है।काली पूजा को लेकर द हिन्दू अखबार में संदीप रॉय Growing up with Kali in Kolkata नाम से लेख लिखा था।जिसमें उन्होंने आर जी कार मेडिकल में हुए बलात्कार के बाद मुख्यमंत्री के एक बयान को उद्धृत किया है।जिसमें मीडिया रिपोर्ट्स में से कहा गया है कि ममता ने कहा कि जिसकी जैसी इच्छा है वो उस हिसाब से कहीं भी आ जा सकता है लेकिन प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में वो हॉस्टल से रात को 12:30 कैसे निकली ?और वो यदि लड़की है तो उसे रात को नहीं निकलना चाहिए था।इसके बाद राजनीतिक सरगर्मी कैसे बढ़ी ?ये सब ने देखा है।लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं है।जब ऐसे बयान आते है दिल्ली में 2008 में पत्रकार सौम्या विश्वनाथन के मर्डर के बाद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा था कि रात के 3 बजे तक अकेले.. आपको इतना भी साहसी नहीं होना है।ऐसा ही मामला गुरुग्राम में 2012 के बलात्कार के बाद बना जब शहर के बॉसों ने कहना शुरू किया कि महिलाओं को रात के आठ बजे के बाद काम नहीं करना चाहिए।

अब जब काली पूजा की घड़ी नजदीक है तो उन प्रतीकों को भी जीवित करने का समय है।जो काली की ऊर्जा व शक्ति में निहित है।संदीप रॉय लिखते है:आज हमें उनकी ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा है। दिवाली की शुरुआत करने वाले मिट्टी के दीये तो खूबसूरत हैं, लेकिन किसी भी चीज़ से ज़्यादा हमें एक ऐसी काली की ज़रूरत है,जो उन्मुक्त और निर्भीक हो, अपनी शर्तों पर जी रही हो।यह अजीब विडंबना है कि जिस राज्य की सरकार इतनी श्रद्धा से उनकी पूजा करती है, उसे महिलाओं की सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका उन पर कर्फ्यू लगाना ही लगता है। आखिर, 'रात वापस लो' आंदोलन बनने से बहुत पहले, नग्न, क्रूर और बेशर्म काली ने रात वापस ले ली थी। 

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