अपने व्याख्यान के आरंभ में भी प्रो जी एन देवी कुछ महत्त्वपूर्ण बातें कही जिसमें मूल्य और अनुशीलन की बात प्रमुख थी कि इसका नाम ही है कुछ सार्थक करिए।महामना हमेशा इसी के लिए प्रयासरत रहे।एक तरफ तिलक यदि हिमालय की तरह थे तो मालवीय गंगा की तरह थे।निर्मल,पवित्र व सहिष्णु।वो तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।पूना फैक्ट में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की।यही नहीं संविधान के जो प्रियमेबल है उसकी अवधारणा की नींव कराची रिजॉल्यूशन से निकली है जिसके सूत्रधार महामना थे।पर उनके ऊपर
कोई भी शोधपरक जीवनी नहीं है।आप लोगों को लिखना चाहिए....
अपने विषय के ऊपर कहा कि मराठी व गुजराती में civilization जैसा कोई शब्द नहीं है।हम culture को भी इससे जोड़ते है लेकिन दोनों अलग है।इस शब्द का पहली बार प्रयोग एडवर्ड गिब्बन ने 18 वीं शताब्दी में अपनी पुस्तक The History of the Decline and Fall of the Roman Empire में किया।यही नहीं जब अंग्रेज भी भारत आए तो उन्होंने कहा था कि हम भारतीयों पर शासन नहीं बल्कि उन्हें सिवलाइज करने आए है।जिसमें भाषा ने भी एक बड़ा रोल अदा किया।उसके बाद उन्होंने भाषा की व्युत्पत्ति से लेकर राजनीति तक किस प्रकार भाषा को राजनीतिज्ञ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहें और भारत की बहुभाषिकता को खत्म करने पर तुले है।जबकि मालवीय जी भी कहा करते थे कि यह देश सबका है।पर आज घृणा और असहिष्णुता की राजनीति चल रही है।
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