वेस्टइंडीज क्रिकेट पर छाये काले बादल
हाल ही में क्रिकेट वर्ल्डकप क्वालिफायर में हारकर वेस्टइंडीज वर्ल्डकप से बाहर हो गया।वेस्टइंडीज का बाहर होना उसके क्रिकेट इतिहास के शिथिलता को बयां कर रहा है।आख़िर 1960-1980 के बीच जो वेस्टइंडीज क्रिकेट के शिखर पर था ,बाद के वर्षों में ऐसा क्या हुआ?जिससे वेस्टइंडीज क्रिकेट अपने ढ़लान पर पहुंच गया।आइये देखते है....... 1983का साल था,कपिलदेव के हाथ में वर्ल्डकप की ट्राफी थी!उनकी टीम ने वो कारनामा कर दिया था जिसकी कोई उम्मीद नहीं थी।गंवई जुमले में कहे तो 'पत्थर पर दूब का निकल आना'क्योंकि उनकी टीम ने क्रिकेट जगत की सबसे मजबूत टीम वेस्टइंडीज को हराकर ये ख़िताब जीता था।ये भारतीय क्रिकेट का वॉटरशेड मोमेंट था। भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर है,उनकी टीम की हालत आज किसी रईस के उजड़े हुए कोठी के भग्नावशेष जैसा है।ऐसी टीम के ख़िलाफ़ भारतीय बल्लेबाज शतक पर शतक ठोंक लहालोट हैं,जो अभी बीते वर्ल्ड चैम्पियनशिप में दहाई के आंकड़े के लिए संघर्षरत थे।इसके बनिस्पत वेस्टइंडीज में सिंगल को भी डबल में कन्वर्ट कर दे रहें हैं। 'विराट' कहते है कि 2012 के साल से ही मैं दो रन चुरा रहा...