वेस्टइंडीज क्रिकेट पर छाये काले बादल

 हाल ही में क्रिकेट वर्ल्डकप क्वालिफायर में हारकर वेस्टइंडीज वर्ल्डकप से बाहर हो गया।वेस्टइंडीज का बाहर होना उसके क्रिकेट इतिहास के शिथिलता को बयां कर रहा है।आख़िर 1960-1980 के बीच जो वेस्टइंडीज  क्रिकेट के शिखर पर था ,बाद के वर्षों में ऐसा क्या हुआ?जिससे वेस्टइंडीज क्रिकेट अपने ढ़लान पर पहुंच गया।आइये देखते है.......



1983का साल था,कपिलदेव के हाथ में वर्ल्डकप की ट्राफी थी!उनकी टीम ने वो कारनामा कर दिया था जिसकी कोई उम्मीद नहीं थी।गंवई जुमले में कहे तो 'पत्थर पर दूब का निकल आना'क्योंकि उनकी टीम ने क्रिकेट जगत की सबसे मजबूत टीम वेस्टइंडीज को हराकर ये ख़िताब जीता था।ये भारतीय क्रिकेट का वॉटरशेड मोमेंट था।
भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर है,उनकी टीम की हालत आज किसी रईस के उजड़े हुए कोठी के   भग्नावशेष   जैसा है।ऐसी टीम के ख़िलाफ़ भारतीय बल्लेबाज शतक पर शतक ठोंक लहालोट हैं,जो अभी बीते वर्ल्ड चैम्पियनशिप में दहाई के आंकड़े के लिए संघर्षरत थे।इसके बनिस्पत वेस्टइंडीज में सिंगल को भी डबल में कन्वर्ट कर दे रहें हैं।
'विराट' कहते है कि 2012 के साल से ही मैं दो रन चुरा रहा हूँ।

इस बात की तस्दीक यही है कि बीते सप्ताह वर्ल्डकप क्वालिफायर मुकाबले में स्कॉटलैंड,नीदरलैंड व जिम्बाब्वे के हाथों हार वेस्टइंडीज वर्ल्डकप से भी बाहर हो गया।अभी ये गम बीता ही नहीं था की तीन दिन में भारत ने टेस्ट मैच जीत वेस्टइंडीज के उस बब्बल को उजागर कर दिया जिससे वो जूझ रही है।

बोर्ड की आर्थिक स्थिति,ट्वेंटी लीग के पैसे पर प्रतिभाशाली क्रिकेटरों का राष्ट्रीय टीम को महत्व न देकर लीग क्रिकेट खेलना।आईसीसी से कम सपोर्ट व कॉर्पोरेट व सरकार के द्वारा वेस्टइंडीज क्रिकेट को पर्याप्त भुगतान न करना। कैरेबियन ,जमैका  ट्रीनाड एन्ड टोबैगो ,बारबाडोस की आपसी खेमेबाजी भी कारण है।
इयान बिशप का मानना है कि ये डाउनफाल धीरे -२ हुआ है ,ये अभी के खिलाड़ियों के साथ नहीं शुरू हुआ।"
ख़ैर कल विवेचना सुन रहा था
वो उस दौरे की कहानी बयां कर रहे थे जब वेस्टइंडीज क्रिकेट अपने शबाब पर था,उनके गेंदबाजों की दहश्त थी।भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर गई थी।पोर्ट ऑफ स्पेन में अपना पहला मैच जीत भी लिया था।दुसरा मैच सबीना पार्क में था,जिसमें वेस्टइंडीज के कप्तान क्लाइव
लॉयड ने चार तेज गेंदबाजों के साथ उतरने का फैसला किया।फिर क्या हुआ ?मैच के शुरुआत में ही भारतीय बल्लेबाजों को समझ आ गया।सुनील गवास्कर व अंशुमान गायकवाड़ ओपन कर रहे थे,जब एक तेज गेंद सुनील गवास्कर के टखने के ऊपर लगी तो गवास्कर ने गायकवाड़ से कहा :मुझे बल्लेबाजी ही नहीं करना,मैं चाहता हूँ की जीवित रहूँ और रोहन को देखूं।क्योंकि वेस्टइंडीज के गेंदबाज शार्ट बॉल व सिर्फ शॉट बॉल फेंक भारतीय खिलाड़ियों को पवेलियन के बजाय हॉस्पिटल भेज रहे थे।
मैच के आख़िर में जब लॉयड से पूछा गया तो उन्होंने कहा "क्या भारतीय हमसे हॉफ बाली की उम्मीद कर रहे थे?"पर अब जब भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर है तब वेस्टइंडीज के गेंदबाज बेदम नज़र आ रहें हैं
।एक वो वेस्टइंडीज की टीम थी और एक ये है।जो वर्ल्डकप से भी बाहर हो गयी है.... यही है वेस्टइंडीज क्रिकेट की बदहाली।

पर इस साल बिना वेस्टइंडीज के वर्ल्डकप अधूरा लगेगा क्योंकि वेस्टइंडीज के बल्लेबाज पॉवर हीटिंग के साथ अपने सेलिब्रेशन व डांस से भी दर्शकों का मनोरंजन करते थे।इस साल वो कमी खलेगी बाकी अब बातें शुरू हुई है कैसे वेस्टइंडीज क्रिकेट अपने पुराने गौरवशाली दिनों की ओर लौट सकता है?ऐसा होना भी चाहिए तभी क्रिकेट जगत में रोमांच व मनोरंजन बना रहेगा।



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