अहमदनगर हुआ अहिल्या नगर

काशी विश्वनाथ धाम में अहिल्या बाई 

एक राजा का सेनापति है, मन्दिर में दर्शनाभिलाषी है।उसकी नज़र एक आठ साल की लड़की पर पड़ती है जिसकी आध्यात्मिकता व चरित्र से सेनापति प्रभावित है!लड़की में उसे पुत्रवधु नज़र आती है।कौन है लड़की है ?लड़की जिसके नाम पर एक घाट है, मन्दिर के कायाकल्प का इतिहास है!या लड़की उस ज़िले से ही आती ही जहाँ कभी अशोक ,राष्ट्रकूट ,पश्चिमी चालुक्य व मध्यकाल में निज़ाम ,मलिक अम्बर की छापामार प्रणाली का इतिहास रहा हो जिसे सीख व छोड़ मराठों का उत्थान व पतन दोनों हुआ।जहाँ कालांतर में नेहरू की कालजयी कृति रची गई जो वहाँ के कैदियों का समर्पित भी है।इन तमाम तरह के इतिहास को समेटे महाराष्ट्र के एक ज़िले को उस लड़की के नाम पर कर दिया गया जिसकी आध्यात्मिकता व चरित्र पर 'मल्हाराव होलकर'का ध्यान गया था और पुत्र के खोने पर जिनको लगा कि पुत्रवधु सती नहीं बल्कि शासिका होगी।ऐसी अहिल्याबाई को उनके जिले अहमदनगर को अब 'अहिल्यानगर' के नाम से जाना जाएगा।बाकी इसके पीछे का गुणा-गणित क्या है?वो समय आने पर ही पता लगेगा।

 

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