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Showing posts from July, 2025

बहुपति प्रथा जो सोशल मीडिया पर छाई

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हिमाचल प्रदेश आज कल सुर्ख़ियों में है।कभी बाढ़ की त्रासदी से कभी उस त्रासदी पर कंगना के बयान से।लेकिन अभी जिस कारण हिमाचल सुर्खियों में है।उसका कारण एक शादी है।हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में एक महिला से दो भाइयों ने शादी की है।शादी में बकायदा 4000 मेहमान भी शरीक हुए हैं।शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हुई और लोगों के बीच में बहुपति प्रथा को लेकर चर्चा भी चली।खैर प्रदीप नेगी व कपिल नेगी नाम के इन भाइयों की एक तरफ तारीफ है तो दूसरी तरफ प्रश्न चिन्ह भी कि आधुनिक समाज में इस तरह की शादी के क्या मायने है?इंटरनेट पर इसी सवाल को लेकर ही बहस है।वहीं दूसरी तरफ जिस समुदाय से ये दोनों भाई आते हैं वहां इस तरह की प्रथा ही रही है। इसी सप्ताह प्रो. कृष्णनाथ का यात्रा वृतांत स्पीति में बारिश पढ़ रहा था।उसमें भी एक प्रसंग में ऐसी प्रथा का वर्णन आता है  वो लिखते है " लाहुली बड़े लड़वय्या होते हैं। प्रायः   हर परिवार में से एक पलटन में जाता है।बड़े भाई का विवाह होता है।द्रौपदी वाद यहां चलता है।एक ही स्त्री सब भाइयों की पत्नी होती है।कहते हैं इसमें कलह नहीं ह...

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश जी का नागरी प्रचारिणी में व्याख्यान

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  नागरी प्रचारिणी सभा के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का आयोजन था।कार्यक्रम के दूसरे दिन राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश जी ने "दो सौ वर्षों की देहरी पर हिन्दी पत्रकारिता का भविष्य "  पर अपने विचार रखे....... हरिवंश जी बीएचयू के पुरा छात्र है,उनको सुनना हमेशा रोचक होता है।हर बार वो तैयारी के साथ आते है।उनके बातचीत में बहुत सारी पुस्तकों का रेफरेंस आता है और उनका आग्रह भी रहता है कि आप इन पुस्तकों को पढ़िए।इन्हीं प्रसंगों के बीच  उन्होंने एक बड़ी महत्त्वपूर्ण बात कही।उनका कहना था कि दुनिया को लगता था कि विचारधारा दुनिया को बदल देगी।लेकिन पुनर्जागरण के बाद टेक्नोलॉजी ने अलग ही बदलाव किया।वो कछुआ व खरगोश कहानी का उदाहरण देते है। उस कहानी की तरह आज टेक्नोलॉजी ड्राइविंग सीट पर है। यही  नहीं  अपने बातचीत का समापन उन्होंने बनारस को याद करते हुए किया।जहां उन्होंने अपने मेंटर कृष्णनाथ जी को याद किया ।वहीं काशीनाथ सिंह के काशी का अस्सी के एक प्रसंग का भी जिक्र किया।प्रो.कृष्णनाथ से उनकी चर्चा हो रही थी भारतीय संस्कृति व पश्चिम संस्कृति को...

हाथ को आया मुंह को न लगा

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  भारत व इंग्लैंड के बीच तीसरा टेस्ट लार्ड्स में था,जहां इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 387 रन बनाएं।वहीं इसके जवाब में भारत ने केएल राहुल के शतक,ऋषभ पंत व जडेजा के अर्धशतकों की मदद से 387 रन बनाने में सफल रही लेकिन बढ़त लेने में असफल रही।जबकि एक समय लग रहा था कि भारत बढ़त लेकर मैच में आगे निकल जायेगा पर ऐसा हो न सका।जब तीसरे दिन के आखिरी सेशन में सिर्फ 6 मिनट का खेल होना था तब इंग्लैंड के ओपनर और भारतीय कप्तान के बीच बहस सोशल मीडिया पर ट्रेंड करती रही।खेल के चौथे दिन भारतीय गेंदबाजों ने कसी गेंदबाजी की और सुंदर ने अपने करियर का उत्कृष्ट स्पेल डाला जिससे इंग्लैंड की पूरी टीम 193 रन पर आल आउट हो गई।चौथे दिन के आखिरी सत्र में भारतीय सलामी जोड़ी मैदान पर थी और चार साल बाद टेस्ट मैच खेल रहे आर्चर के हाथ में गेंद।आर्चर ने इस मैच में अपनी गेंदबाजी से भारतीय टीम की उम्मीदों को पहले ही ओवर में झटका दिया जब एक शॉर्ट पिच गेंद पर तेजस्वी अपना विकेट खो बैठे।इसके बाद इंग्लैंड की टीम ने सधी गेंदबाजी की और भारत के बल्लेबाज डिफेंसिव क्रिकेट खेलते रहे जिससे चौथे दिन के खेल खत्म होने ...

ड्यूक गेंद

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  निकेश दिल्ली में रहते है,लेकिन उनका क्रिकेट मन आजमगढ़ में रहता है।इसलिए मुखर्जी नगर में यदा कदा क्रिकेट खेल लेते है।पर विपक्षी टीम उनके गेंदबाजी से भय खाती है वो उनको खेलते देख खुश नहीं होते हैं।कल भारत व इंग्लैंड के बीच लार्ड्स पर मैच हो रहा था तो निकेश बुमराह को देख के अपनी गेंदबाजी की प्रैक्टिस कर रहे थे।साथ ही साथ वो ड्यूक गेंद के शेप के बिगड़ने को भी समझा रहे थे।और इस सीरीज में ड्यूक के गेंद को लेकर खूब चर्चा हुई है....ड्यूक गेंद की कहानी क्या है? भारत और इंग्लैंड के बीच चल रहे टेस्ट मैच में बल्लेबाजों के शतक के बाद कोई सुर्खियों में आया तो ड्यूक गेंद।अमूमन टेस्ट मैच कूकाबूरा की गेंद से होती है लेकिन इंग्लैंड में ड्यूक से ही मैच खेले जाते है।जो शुरू के ओवर में शेप में रहती है और बाद में शेप बिगड़ने के बाद इससे गेंदबाजी करना कठिन हो जाता।लार्ड्स टेस्ट से पहले ऋषभ पंत से जब ड्यूक गेंद के ऊपर प्रश्न पूछा गया तो पंत का जवाब कुछ यूं था"जब गेंद सॉफ्ट हो जाती है तो ये ज्यादा कुछ नहीं करती।लेकिन गेंद बदलने के बाद फिर से स्विंग करने लगती है तब खेलना मुश्किल होता है।एक बल्लेबाज़ के त...

जिन्दगी मौत न बन जाए यारों

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साल 2023 का था ,जून के गर्म महीने में एक  ख़बर आई कि टाइटैनिक का मलबा देखने गए पांच लोग लापता हैं।लेकिन इसमें  जो बड़ी ख़बर थी वो कि मलबा देखने वालों में ब्रिटेन व पाकिस्तान के अरबपति भी थे।इस पूरे घटना क्रम,ओसन गेट के बनने और डूबने की कहानी पर नेटफ्लिक्स ने एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है जिसमें कंपनी के सीईओ स्टॉकटन रश व उनके ड्रीम प्रोजेक्ट को विस्तार से दिखाया गया है...जिसकी कहानी कुछ यूं है... एक खानदानी रईस लड़का है जिसके परिवार के दो लोगों ने डिक्लरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस पर साइन किया था।वहीं उसकी पत्नी दो ऐसे लोगों की ग्रेट ग्रेट ग्रैंडडाटर थी जो टाइटैनिक में मरे थे ,स्ट्रॉउस परिवार था जिसने मेसी जैसे स्टोर डिपार्टमेंट खड़ा किया था...उसने प्रिंसटन से पढ़ाई की थी और पढ़ाई में औसत रहा।लेकिन उसका ध्येय बेजोस और मस्क जैसा बनना था (big swingin dicks)।इसलिए उसने एक ऐसी समरसिबल बनाने की कोशिश की जो पांच लोगों को बैठाकर टाइटैनिक का मलबा दिखा सके।लोगों को टाइटैनिक आज भी आकर्षित करता है।अंग्रेजी में छपे एक लेख में तीन शब्द जो पूरी दुनिया को पता है उसमें एक टाइटैनिक भी (Coca cola ,God) है।व...

शुभमन गिल

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  साल 1990 का था पंजाब में के पी एस गिल एसपी हुआ करते थे।उनका स्लोगन था मारूंगा भी और रोने भी नहीं दूंगा।पंजाब तब उग्रवाद की जड़ में था।लेकिन यहां भी बात पंजाब से जुड़ी है, पाकिस्तान की सीमा से सटा एक जिला है फाजिल्का जिसमें एक गांव है जैमल वाला जहां अपने पिता के फॉर्म हाउस में एक लड़का दिन भर प्रैक्टिस करता।उसके दोस्त जब खेलते तो उनको डांट पड़ती पढ़ाई के लिए लेकिन उसके साथ ऐसा नहीं था।बचपन के ही साथी रहे मयंक मारकंडे के साथ फीफा गेम खेलता जो मन में आता वो खाता लेकिन जिम में सबसे पहले पहुंचता।कप्तान बनने की उसकी इच्छा नहीं थी ,अंडर 19 में कप्तानी कर सकता था लेकिन छोड़ दिया।उसने शॉर्ट आर्म जैब से अलग ही छाप छोड़ी ,लोग उसे प्रिंस कहते हैं, कमेंट्री करने वाले प्रिंस से किंग की ओर अग्रसर बताते हैं।पर शतक के बाद वो सात्विक मुस्कान साधे रहता है .... यह कहानी भारतीय टेस्ट के युवा कप्तान शुभमन गिल की जिन्हें न सिर्फ कप्तानी से बल्कि बल्लेबाजी से भी एक बड़े वैक्यूम को भरना है जो एक ही समय में दो दिग्गज भारतीय बल्लेबाज रोहित शर्मा व विराट कोहली के टेस्ट से संन्यास लेने के बाद खाली हुआ है।आगे...

अहिल्याबाई होलकर

  बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु के बाद बाजीराव प्रथम गद्दी पर बैठे व कृष्णा से अटक तक का नारा दिया था।इन्हीं के शासन में मराठों ने पुर्तगालियों से सालसेट व बसीन भी जीता।यही नहीं इनके शासन में मराठों की चार भावी पीढ़ियों का भी उदय हुआ जिसमें इंदौर के होल्कर,ग्वालियर के सिंधिया,बड़ौदा के गायकवाड़ व नागपुर के भोंसले थे।जिसमें इंदौर के होलकर रियासत की रानी ने अपने राज काज से न सिर्फ होलकर रियासत बल्कि भारत वर्ष को भी समृद्ध किया।रानी के बारे में कहा जाता है कि होलकर वंश के संस्थापक मल्हार राव होलकर एक रात चौदी राज्य में डेरा डाला था।वहीं उन्होंने मन्कोजी शिंदे की आठ वर्षीय बेटी को देखा,जिसकी निष्ठा व चरित्र से वो काफी प्रभावित हुए और अपन पुत्र खांडे राव के साथ विवाह का प्रस्ताव रखा।उस बेटी का नाम था अहिल्या बाई।शादी के बाद भी अहिल्या बाईं को शिक्षा के साथ साथ सैन्य व राज प्रशासन की शिक्षा दी गई।1745 तक वह मालेराव व मुक्ता बाई की मां बन गई थी खांडेराव अपने पिता के साथ भरतपुर के अभियान में साथ थे,इसी अभियान में उनकी गोली लगने से मृत्यु हो गई।इसके बाद खंडेराव की पत्नियां सती होने को आगे बढ़ी ...