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Showing posts from July, 2023

वेस्टइंडीज क्रिकेट पर छाये काले बादल

 हाल ही में क्रिकेट वर्ल्डकप क्वालिफायर में हारकर वेस्टइंडीज वर्ल्डकप से बाहर हो गया।वेस्टइंडीज का बाहर होना उसके क्रिकेट इतिहास के शिथिलता को बयां कर रहा है।आख़िर 1960-1980 के बीच जो वेस्टइंडीज  क्रिकेट के शिखर पर था ,बाद के वर्षों में ऐसा क्या हुआ?जिससे वेस्टइंडीज क्रिकेट अपने ढ़लान पर पहुंच गया।आइये देखते है....... 1983का साल था,कपिलदेव के हाथ में वर्ल्डकप की ट्राफी थी!उनकी टीम ने वो कारनामा कर दिया था जिसकी कोई उम्मीद नहीं थी।गंवई जुमले में कहे तो 'पत्थर पर दूब का निकल आना'क्योंकि उनकी टीम ने क्रिकेट जगत की सबसे मजबूत टीम वेस्टइंडीज को हराकर ये ख़िताब जीता था।ये भारतीय क्रिकेट का वॉटरशेड मोमेंट था। भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर है,उनकी टीम की हालत आज किसी रईस के उजड़े हुए कोठी के    भग्नावशेष   जैसा है।ऐसी टीम के ख़िलाफ़ भारतीय बल्लेबाज शतक पर शतक ठोंक लहालोट हैं,जो अभी बीते वर्ल्ड चैम्पियनशिप में दहाई के आंकड़े के लिए संघर्षरत थे।इसके बनिस्पत वेस्टइंडीज में सिंगल को भी डबल में कन्वर्ट कर दे रहें हैं। 'विराट' कहते है कि 2012 के साल से ही मैं दो रन चुरा रहा...

स्टोक्स की विस्फोटक पारी

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इंग्लैंड व आस्ट्रेलिया के बीच एशेज का दूसरा मैच था। इंग्लैंड शुरुआत से ही लड़खड़ा गयी थी।उनकी आधी टीम 85 रन पर पवेलियन लौट गई थी।आस्ट्रेलिया जीत की ओर कदम बढ़ा चुका था और सीरीज में भी 2-0 से आगे हो जाता और आख़िर में हुआ भी ,कमिंस ने 6 विकेट लेकर पास ही पलट दिया लेकिन एक समय आस्ट्रेलिया की साँस अटक गई थी,जब स्टोक्स बल्लेबाजी कर रहे थे  तो क्योंकि इससे पहले वो एक बार इंग्लैंड को ऐसी स्थिति से मैच जीता चुके थे पर उस दिन कारनामा दोहरा ही दिया होता लेकिन स्टॉर्क ने आउट कर ऐसा होने से आस्ट्रेलिया को बचा लिया ।उस दिन स्टोक्स को देख लिखा था.... शतक के बाद बल्ला उठाकर दर्शकों का अभिवादन करते स्टोक्स क्रिकेट के मक्का में बैठना था,पर कोच नाखुश था।उसने कहा"आप इंग्लैण्ड के लिए नहीं खेलना चाहते।आप बस अपने साथियों के साथ पेशाब करना चाहते है और अच्छा समय बिताना चाहते हैं।"समय तो बीत ही रहा था ,कभी ड्रेसिंग रूम में हाथ टूटना,पब में मार पीट,पिता का चले जाना वगैरा -२में।तब समझ आ गया कहीं कुछ गड़बड़ है।साइकोलॉजिस्ट के पास गए जिन्होंने इससे पहले कई खिलाड़ियों की समस्याओं का निवारण किया था।इनको भी थी...

BARBIE से इतर गूंगी गुड़िया

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 कार्लो स्पेंसर अपने एक साक्षात्कार में कहती है कि 1950 के बाद सिर्फ पांच क्षेत्रों में महिलाओं को(टीचर,नर्स,सचिव,क्लर्क व पत्नी)काम मिलता था।फ़िर उनको मैगजीन में Mattel Toy का एड दिखा और उन्हें अपना काम मिल गया।1963 से 1986 तक उन्होंने इन मैटल टॉय को डिजाइन किया।पर अभी ये चर्चा में है क्योंकि Barbie नाम की फ़िल्म आ रही है,जिसमें लॉ-२ लैंड वाले रयान गोसलिंग व the wolf of wall street वाली मार्गो रॉबी लीड में है।पर ट्रेलर से ही फ़िल्म विवादों में है क्योंकि ट्रेलर                             BARBIE का वो सीन  में 'साउथ चाइना सी'को चीन के कब्ज़े में दिखा दिया गया है।जबकि चीन के इतर इस पर ताइवान, वियतनाम,फिलीपींस,ब्रूनेई व मलेशिया भी इसके लिए खम ठोंकते है।इसीसे वियतनाम ने Babie पर ही बैन लगा दिया।हालांकि हॉलीवुड से इस तरह का कृत्य कोई पहले नहीं हुआ है, वो ऐसा करता रहता है क्योंकि अमेरिका के बाहर यदि आपको पैसा कमाना है ख़ासकर चाइना में तो आपको उनके मनमाफ़िक ही रखना होगा अन्यथा फ़िल्म बैन हो जाएगी।वैसे भी खबरों में ...

बारी में आम के किस्से

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बारी में मार्केज़ संग व्हाट्सएप पर से  

अहमदनगर हुआ अहिल्या नगर

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काशी विश्वनाथ धाम में अहिल्या बाई  एक राजा का सेनापति है, मन्दिर में दर्शनाभिलाषी है।उसकी नज़र एक आठ साल की लड़की पर पड़ती है जिसकी आध्यात्मिकता व चरित्र से सेनापति प्रभावित है!लड़की में उसे पुत्रवधु नज़र आती है।कौन है लड़की है ?लड़की जिसके नाम पर एक घाट है, मन्दिर के कायाकल्प का इतिहास है!या लड़की उस ज़िले से ही आती ही जहाँ कभी अशोक ,राष्ट्रकूट ,पश्चिमी चालुक्य व मध्यकाल में निज़ाम ,मलिक अम्बर की छापामार प्रणाली का इतिहास रहा हो जिसे सीख व छोड़ मराठों का उत्थान व पतन दोनों हुआ।जहाँ कालांतर में नेहरू की कालजयी कृति रची गई जो वहाँ के कैदियों का समर्पित भी है।इन तमाम तरह के इतिहास को समेटे महाराष्ट्र के एक ज़िले को उस लड़की के नाम पर कर दिया गया जिसकी आध्यात्मिकता व चरित्र पर 'मल्हाराव होलकर'का ध्यान गया था और पुत्र के खोने पर जिनको लगा कि पुत्रवधु सती नहीं बल्कि शासिका होगी।ऐसी अहिल्याबाई को उनके जिले अहमदनगर को अब 'अहिल्यानगर' के नाम से जाना जाएगा।बाकी इसके पीछे का गुणा-गणित क्या है?वो समय आने पर ही पता लगेगा।  

लाल क़िला, जमुना के जल में

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जमुना का जल बढ़ने के बाद मंगी ब्रिज का दृश्य साभार-THE INDIAN EXPRESS  अमीर ख़ुसरो ने 'किरान-उस -सादौन में दिल्ली को हजरत-दिल्ली(प्रतिभाशाली दिल्ली)कहा है!इसी दिल्ली में एक बादशाह हुआ करता था लोग उसे 'रंगीला'कहते थे।रंगीला बादशाह अपनी रंग लीला ही में व्यस्त था कि करनाल में १७३८-३९में ईरान के बादशाह ने धावा बोल दिया।रंगीला बादशाह के होश फ़ाख्ता हो गए।किसी तरह मीर बख़्शी ने ५० लाख में मामला सुलह कराया पर मीरबख़्शी न बन पाये सआदत खाँ ने कहा दिल्ली पर आक्रमण करिये20 करोड़ मिलेंगे।सआदत खां दे न सका  इसलिए आत्महत्या कर लिया।पर बादशाह को 20 करोड़ तो न पर लाल क़िले से तख़्त ए ताऊस व कोहिनूर हाथ लगा। वहीं लाल क़िला जिसे बादशाह ने इसलिए बनवाया की आगरा में गर्मी हो रही थी। या बादशाह को स्थापत्य में रूचि थी?जो भी हो १६३८ में काम प्रारम्भ हुआ १६४८में सम्पन्न,बादशाह ने लाहौरी दरवाज़े से क़िले में प्रवेश किया।                       लाल क़िले के बग़ल में यमुना इस मौक़े पर क़िले में जश्न मना।क़िले के अंदर ठंडक थी,क़िले के अंदर नौबतखाना,नक्कार खाना ,हयात बख़्...