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बिहार विधानसभा

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आ गए है।राजग को इस तरह के परिणाम की भी आशा नहीं रही होगी।वहीं महागठबंधन जो चुनाव से पहले ही शपथ की तैयारी कर रहा था उसे अब इस परिणाम के शपथ पर मंथन की जरूरत है।दूसरी तरफ चुनाव से पहले जनसुराज व प्रशांत किशोर के दावे की जमीनी हकीकत पर जो परिणाम आया वह भी कम आश्चर्यचकित नहीं करता।जहां चुनाव से पहले उनके ऊपर एक्स फैक्टर के लेख आते थे।अब उनके राजनीतिक अंत तक की बात लिखी जा रही है।लेकिन यह कहने में कोई गुरेज नहीं कर सकता कि उन्होंने बिहार में जनता के मुद्दे को उठाया और एक नैरेटिव तैयार किया।पर बिहार की राजनीति में मुद्दों से ज्यादा मास लीडर व जाति की चर्चा न आए।ये हो नहीं सकता Caste has served since Independence both as an instrument of political democratic India, castes—as a social unit—have always been perceived as a strong vehicle of improving access to power and promotion of interests and it continues to matter. Increased political significance of castes has provided them a greater social hold. Democracy, industrialisation and an equitable economic redist...
 मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में प्रो.जी एन देवी का व्याख्यान था जिसका विषय INDIA AS A LINGUISTIC CIVILIZATION था। अपने व्याख्यान के आरंभ में भी प्रो जी एन देवी कुछ महत्त्वपूर्ण बातें कही जिसमें मूल्य और अनुशीलन की बात प्रमुख थी कि इसका नाम ही है कुछ सार्थक करिए।महामना हमेशा इसी के लिए प्रयासरत रहे।एक तरफ तिलक यदि हिमालय की तरह थे तो मालवीय गंगा की तरह थे।निर्मल,पवित्र व सहिष्णु।वो तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।पूना फैक्ट में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की।यही नहीं संविधान के जो प्रियमेबल है उसकी अवधारणा की नींव कराची रिजॉल्यूशन से निकली है जिसके सूत्रधार महामना थे।पर उनके ऊपर कोई भी शोधपरक जीवनी नहीं है।आप लोगों को लिखना चाहिए.... अपने विषय के ऊपर कहा कि मराठी व गुजराती में civilization जैसा कोई शब्द नहीं है।हम culture को भी इससे जोड़ते है लेकिन दोनों अलग है।इस शब्द का पहली बार प्रयोग एडवर्ड गिब्बन ने 18 वीं शताब्दी में अपनी पुस्तक The History of the Decline and Fall of the Roman Empire में किया।यही नहीं जब अंग्रेज भी भारत आए तो उन्होंने कहा था कि हम भारतीयों पर शासन नहीं बल्कि उ...

अंधेरे में

 अंधेरे में स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से दीपिका पादुकोण को मेंटल हेल्थ पर बोलते हुए पहली बार सुना था।तब साल 2017 का था।उसके बाद से भारत में अलग अलग सेलिब्रेटी ने मेंटल हेल्थ के मुद्दे पर बोलना शुरू किया।तब मानस का परिष्कार नहीं हुआ था।आम लोगों की तरह मुझे भी यही लगता था कि मेंटल हेल्थ के नाम पर अपनी कमजोर को छुपाया जा रहा है।लेकिन विश्वविद्यालय में पठन पाठन से मानस का परिष्कार हुआ। और लोगों से इस विषय पर बातचीत हुई।तब जाकर इस विषय की गंभीरता समझ आई।बीते दिनों बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में इसी विषय पर एक नाटक देखने पहुंचा।नाटक का नाम 'अंधेरे' में था।पहली बार मुझे लगा कि नाटक मुक्तिबोध की कविता अंधेरे में को एडॉप्ट करके तैयार किया गया है।इसलिए हाल में पहुंचने के बाद मुक्तिबोध की कविता पढ़ता रहा।लंबी कविता थी और एंकर की तरफ से अनाउंसमेंट हो रहा था कि नाटक वीसी साहब के थोड़ी देर में पहुंचने के बाद शुरू होगा।तब तक अंधेरे हाल में अंधेरे में कविता पढ़ता रहा।इसलिए की नाटक समझ आए क्योंकि हिन्दी में ऐसी धारणा है कि मुक्तिबोध की कविता कठिन है।उनकी कविता आसानी से...

बंगाल में काली पूजा

पिछले दिनों अपने सीनियर के साथ बनारस में लक्सा स्थित रामकृष्ण आश्रम में दुर्गा पूजा में शामिल होने का योग बना।यहां दुर्गा की विधि विधान से पूजा तो देखा ही साथ साथ बंगाल की संस्कृति को करीब से समझने का अवसर भी रहा।यही नहीं कुछ नई बातें भी पता चली जिसमें शरद पूर्णिमा के दिन यहां लक्ष्मी पूजा मनाई जाती है।जबकि उत्तर भारत में लक्ष्मी पूजा अमावस्या के दिन होती है।वहीं उत्तर भारत में जब दीपावली मनाई जाती है तो बंगाल अपितु असम में काली पूजा की होती है।काली पूजा को लेकर द हिन्दू अखबार में संदीप रॉय Growing up with Kali in Kolkata नाम से लेख लिखा था।जिसमें उन्होंने आर जी कार मेडिकल में हुए बलात्कार के बाद मुख्यमंत्री के एक बयान को उद्धृत किया है।जिसमें मीडिया रिपोर्ट्स में से कहा गया है कि ममता ने कहा कि जिसकी जैसी इच्छा है वो उस हिसाब से कहीं भी आ जा सकता है लेकिन प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में वो हॉस्टल से रात को 12:30 कैसे निकली ?और वो यदि लड़की है तो उसे रात को नहीं निकलना चाहिए था।इसके बाद राजनीतिक सरगर्मी कैसे बढ़ी ?ये सब ने देखा है।लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं है।जब ऐसे बयान आते है दिल्ली में ...

कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली

बनारस में लल्लनटॉप अड्डा हो रहा था। लल्लनटॉप अड्डा के मंच पर पांच विद्वान मौजूद थे।उनमें प्रोफेसर अवधेश प्रधान व व्योमेश शुक्ल भी थे।अड्डा के आरंभ में ही सौरभ द्विवेदी ने प्रोफेसर अवधेश प्रधान से बनारस को लेकर प्रश्न किया कि बनारस को लेकर बहुत सारे मिथ ,बहुत सारा रोमैनटिसीजम चलता है।आप बनारस को किस दृष्टि से देखते है?एक वो दृष्टि है,जिस ढंग से पेश किया जा रहा है।पिछले पांच,दस ,पंद्रह ,बीस साल से, वो टूरिज्म वाला बनारस है।और एक बनारस  है,जो यहां के लोग जीते हैं,जो यहां की हवा की मलंगई के साथ घुला मिला है। इसके उत्तर में प्रोफेसर अवधेश प्रधान ने कहा कि बनारस का जो रोमांटिक चेहरा है,वो उसकी मस्ती का चेहरा है।और उसकी लोक संस्कृति का चेहरा है।लेकिन क्लासिक रूप से तो काशी यानि प्रकाश की नगरी है............. इस प्रकाश की नगरी में दीपावली के बाद पुनः प्रकाश होने जा रहा है।अब बारी देव दीपावली की है।पौराणिक आख्यानों में इसकी क्या कहानी है ?और आज के समय  बनारस में देव दीपावली में कितना बदलाव आया है?आगे के लेख में इन्हीं पर चर्चा है.....  हिन्दू धर्म में पूर्णिमा का अपना ही महत्त्व ह...

बास्केटबॉल का गणित

एक जमाने में DVD का क्रेज हुआ करता था।उसमें फिल्मों का कैसेट लगता और टीवी पर फिल्में चलती।पर फिल्म आज की तरह जब मन किया ओटीटी खोला देख लिया ऐसा नहीं था।तब किसी के बियाह या बारात का इंतजार करना होता था।क्योंकि बारात आती तो उसमें पर्दे पर फिल्म चलती या आर्केस्टा का डांस होता।पर्दे पर फिल्म देखने के लिए तो कभी परमिशन मिल भी जाती लेकिन आर्केस्टा के लिए कभी नहीं ऐसा होता।वो समय शील का था।अब वो बचा नहीं क्योंकि आज आप किसी को रोक नहीं सकते।दूसरी तरफ फिल्म देखने का एक समय सरस्वती पूजा के समय होता था।उस समय जहां जहां सरस्वती जी की मूर्ति होती वहां पर्दे पर या टीवी पर फिल्म जरूर चलती थी।एक दफा मेरे अपने मोहल्ले में सरस्वती की मूर्ति रखी गई।सबका विचार बना कि उधार पर टीवी व डीवीडी लाया जाए।यहां भी रात में फिल्म चलेगी।यह सब तय हो गया तो पेंच फंस गया कौन सी फिल्म चलेगी?हम ने कहा कि कोई मिल गया चलाइए।खूब आनंद भी आएगा और हर कोई देख भी सकता है।फिल्म की  कहानी एक कम आइक्यू वाले लड़के और एलियन के जादू से आए परिवर्तन पर थी।जिसमें एक सीन बास्केटबॉल का भी है।जिसमें बास्केटबॉल का मैच होता है।एक तरफ फिल्म...

गोपाल पाठा

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  हाल ही में बंगाल फाइल्स का ट्रेलर आया है।ट्रेलर के रिलीज से ही विवाद नत्थी हो गया है।जैसे कश्मीर फाइल्स को भी लेकर हुआ था।जो 1990में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए ननरसंहार  पर केंद्रित थी।यहां 1946 में डायरेक्ट एक्शन प्लान के समय हुए भीषण दंगों का।लेकिन ट्रेलर आने के बाद जो चेहरा सुर्खियों में आया है बंगाल फाइल्स का एक दृश्य क्रेडिट बंगाल फाइल्स ट्रेलर  इन्हीं का है।इनका नाम है गोपाल पाठा जो ट्रेलर में कहते है भारत हिन्दुओं का राष्ट्र है।कॉलेज स्ट्रीट के सामने इनकी मीट की दुकान थी।इनका खुद का अपना एक अखाड़ा था आज के भाषा में गैंग।इसी अखाड़े के लड़कों ने दंगों के समय हिन्दुओं की रक्षा की।कांग्रेस के अध्यक्ष रहे bc रॉय इनके दोस्त हुआ करते थे।लेकिन कहने वाले कहते हैं गुंडों को राजनीतिक सरंक्षण की आवश्यकता होती है।यहां भी कुछ वैसा ही मामला था।इसी दंगे के बाद गांधी यहां आए थे लोग उनके चरणों में अपना शस्त्र रखते।लोगों ने गोपाल पाठा से भी कहा तुम अपना शस्त्र गांधी के चरणों में क्यों नहीं रख देते ?पाठा ने कहा कि इन शास्त्रों से मैंने अपने मोहल्ले की महिलाओं की ,लोगों की जान बचाई ह...