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गोपाल पाठा

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  हाल ही में बंगाल फाइल्स का ट्रेलर आया है।ट्रेलर के रिलीज से ही विवाद नत्थी हो गया है।जैसे कश्मीर फाइल्स को भी लेकर हुआ था।जो 1990में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए ननरसंहार  पर केंद्रित थी।यहां 1946 में डायरेक्ट एक्शन प्लान के समय हुए भीषण दंगों का।लेकिन ट्रेलर आने के बाद जो चेहरा सुर्खियों में आया है बंगाल फाइल्स का एक दृश्य क्रेडिट बंगाल फाइल्स ट्रेलर  इन्हीं का है।इनका नाम है गोपाल पाठा जो ट्रेलर में कहते है भारत हिन्दुओं का राष्ट्र है।कॉलेज स्ट्रीट के सामने इनकी मीट की दुकान थी।इनका खुद का अपना एक अखाड़ा था आज के भाषा में गैंग।इसी अखाड़े के लड़कों ने दंगों के समय हिन्दुओं की रक्षा की।कांग्रेस के अध्यक्ष रहे bc रॉय इनके दोस्त हुआ करते थे।लेकिन कहने वाले कहते हैं गुंडों को राजनीतिक सरंक्षण की आवश्यकता होती है।यहां भी कुछ वैसा ही मामला था।इसी दंगे के बाद गांधी यहां आए थे लोग उनके चरणों में अपना शस्त्र रखते।लोगों ने गोपाल पाठा से भी कहा तुम अपना शस्त्र गांधी के चरणों में क्यों नहीं रख देते ?पाठा ने कहा कि इन शास्त्रों से मैंने अपने मोहल्ले की महिलाओं की ,लोगों की जान बचाई ह...

बाढ़ किसी के लिए राहत किसी के लिए मुसीबत

गांव के उत्तरी छोर पर दाखिल होने पर एक अधकचरा खड़ंजा है।जिसके दोनों तरफ खेतों का एक बड़ा चक हैं।कुछ खेतों में पानी भरा है।जबकि एकाद खेत में पानी के ऊपर धान की फसल दिखती है।जो बाढ़ के पानी से बदरंग हो गई है।उसका हरा रंग उड़ गया है।खड़ंजे से आगे बढ़ने पर एक बगीचा है जिसमें एक पोल के ऊपर कुछ लोग बैठे हैं।ये वही लोग हैं जिनके खेतों में बाढ़ का पानी घुस गया था।वो अपनी खेती व बाढ़ से हुए नुकसान पर बातचीत करते हैं।वहीं मझौले किस्म के किसान पीयूष राय बातचीत में कहते है कि पिछली बार तो कुछ खाने और बेचने का इंतजाम हो गया था।लेकिन इस बार जिस दिन रोपाई हुई उसके अगले ही दिन पानी भर गया।एक खेत में तो बीज रखा गया था वो बिना रोपे ही बह गया।उन्हीं के बगल में लिटिल राय जो पूरी तैयारी कर रहे थे कि उनका खेत रोप दिया जाए,लेकिन बाढ़ के पानी को देखकर वो पीछे हट गए।अब पानी उतर गया है तो फिर से तैयारी कर रहें है।वहीं ताल के नीचे की तरफ पारस राय का खेत है कहते है कि पानी उतर तो गया है लेकिन तीन बार बढ़ता घटता है।अभी तो एक बार ही पानी बढ़ा है।जगह जगह बादल फट रहें है तो पानी एक बार आयेगा तो जरूर पर पानी जिन खेतों...

एंडरसन तेंदुलकर ट्राफी के मध्य मंसूर अली पटौदी

  भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट श्रृंखला चल रही है।इस श्रृंखला को पहले पटौदी ट्रॉफी के नाम से जाना जाता था।लेकिन इस दौरे पर इसका नाम बदलकर तेंदुलकर एंडरसन ट्रॉफी कर दिया गया है।ट्रॉफी के नाम बदलने पर पटौदी परिवार की प्रतिक्रिया भी आई।शर्मिला टैगोर ने कहा कि मुझे उनकी तरफ से कोई खबर नहीं मिली है, लेकिन ECB ने सैफ को एक पत्र भेजा है जिसमें कहा गया है कि वे ट्रॉफी को रिटायर कर रहे हैं। अगर BCCI टाइगर की विरासत को याद रखना चाहती है या नहीं रखना चाहती, तो यह उनका निर्णय है।"बाद में वो इस फैसले से दुःखी भी थी।वहीं दूसरी तरफ सचिन की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान तक नहीं आया जिससे उनके फैन्स को भी चौकाया।लेकिन सचिन तेंदुलकर ने स्काई स्पोर्ट्स से बातचीत में अपनी चुप्पी तोड़ी।स्काई स्पोर्ट्स से बातचीत में सचिन ने कहा कि मैंने पटौदी फैमिली से फोन पर बातचीत की और हम ने ये तय किया कि किसी तरह की उनकी लेगसी को बनाए रखा जाए।साथ ही साथ मैंने इसके लिए जय शाह ,Bcci व Ecb से भी बातचीत कि कुछ नया इंट्रड्यूस किया जाए जो पटौदी फैमिली में पहले कभी नहीं हुआ हो।ये हुआ भी जीतने वाले कप्तान क...

लोहिया ने महिलाओं के संबंध में क्यों कहा था हिंदुस्तान का दिमाग सड़ा गला है

पिछले दिनों प्रेमानंद महाराज का एक बयान खूब वायरल हुआ।उनके बयान के बाद बहुत सारी प्रतिक्रियाएं भी आई। कुछ लोग उनके बयान से सहमति भी जता रहे थे वहीं कुछ लोग आधुनिक समाज में संत के इस बयान पर नाराज भी दिखे।ऐसे में सवाल उठता है प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा? दरअसल अपने भक्तों के सवाल के जवाब में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आजकल बच्चों और बच्चियों के चरित्र पवित्र नहीं है तो अच्छे कैसे आएंगे।हमारी सारी माताओं बहनों के पहले रहन-सहन देखो।हम अपने गांव की बात बता रहे हैं। बूढ़ी थी पर इतने से नीचे इतना घूंघट रखती थीं।आज बच्चे बच्चियां कैसी पोशाकें पहन रहे हैं ?कैसे आचरण कर रहे हैं? एक लड़के से ब्रेकअप दूसरे से व्यवहार फिर दूसरे से ब्रेकअप फिर तीसरे से व्यवहार और व्यवहार व्यभचार में परिवर्तित हो रहा है।कैसे शुद्ध होगा? मान लो हमें चार होटल के भोजन खाने की जबान में आदत पड़ गई है तो घर की रसोई का भोजन अच्छा नहीं लगेगा। जब चार पुरुष से मिलने की आदत पड़ गई है तो एक पति को स्वीकार करने की हिम्मत उसमें नहीं रह जाएगी। ऐसे ही लड़का जब चार लड़कियों से व्यभिचार करता है तो वो अपनी पत्नी से संतुष्ट नहीं रहेगा...

चेस खिलाड़ी Praggnanandhaa

प्रेमचन्द की कहानी है शतरंज के खिलाड़ी जो अवध  के अवसान पर केंद्रित है।इसी अवध में मेरे चेस के ट्रेनर राजन पांडे जी ने चेस की बेसिक ओपनिंग E4 सिखाया था। राज शमानी को Praggnanandhaa ने उनके पॉडकास्ट प यही खेल सिखाया।साथ ही साथ अपने चेस जर्नी के बारे में भी बातें कही।शमानी के इन्सिक्योर के प्रश्न पर Praggnanandhaa ने कहा कि वो इन्सिक्योर महसूस कर रहे थे जब उनके जेनरेशन के लोग सफलता अर्जित कर रहे थे लेकिन अब वो ऐसा महसूस नहीं करते।अब वो उनसे इंस्पायर होते हैं।यही नहीं मैग्नस कार्लसन को रात के दो बजे हराने से लेकर चेस की साइकोलॉजी,चेस की ऑडियंस बूम में सागर शाह व समय रैना ने बड़ा काम किया।लेकिन समय को एक जोक के लिए समय से पीछे धकेल दिया गया।पर इस पॉडकास्ट की जो रिल कटेगी वोPraggnanandhaa विभूति वाले जवाब पर कि we come from ashesh and go back to ashesh.

बहुपति प्रथा जो सोशल मीडिया पर छाई

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हिमाचल प्रदेश आज कल सुर्ख़ियों में है।कभी बाढ़ की त्रासदी से कभी उस त्रासदी पर कंगना के बयान से।लेकिन अभी जिस कारण हिमाचल सुर्खियों में है।उसका कारण एक शादी है।हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में एक महिला से दो भाइयों ने शादी की है।शादी में बकायदा 4000 मेहमान भी शरीक हुए हैं।शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हुई और लोगों के बीच में बहुपति प्रथा को लेकर चर्चा भी चली।खैर प्रदीप नेगी व कपिल नेगी नाम के इन भाइयों की एक तरफ तारीफ है तो दूसरी तरफ प्रश्न चिन्ह भी कि आधुनिक समाज में इस तरह की शादी के क्या मायने है?इंटरनेट पर इसी सवाल को लेकर ही बहस है।वहीं दूसरी तरफ जिस समुदाय से ये दोनों भाई आते हैं वहां इस तरह की प्रथा ही रही है। इसी सप्ताह प्रो. कृष्णनाथ का यात्रा वृतांत स्पीति में बारिश पढ़ रहा था।उसमें भी एक प्रसंग में ऐसी प्रथा का वर्णन आता है  वो लिखते है " लाहुली बड़े लड़वय्या होते हैं। प्रायः   हर परिवार में से एक पलटन में जाता है।बड़े भाई का विवाह होता है।द्रौपदी वाद यहां चलता है।एक ही स्त्री सब भाइयों की पत्नी होती है।कहते हैं इसमें कलह नहीं ह...

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश जी का नागरी प्रचारिणी में व्याख्यान

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  नागरी प्रचारिणी सभा के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का आयोजन था।कार्यक्रम के दूसरे दिन राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश जी ने "दो सौ वर्षों की देहरी पर हिन्दी पत्रकारिता का भविष्य "  पर अपने विचार रखे....... हरिवंश जी बीएचयू के पुरा छात्र है,उनको सुनना हमेशा रोचक होता है।हर बार वो तैयारी के साथ आते है।उनके बातचीत में बहुत सारी पुस्तकों का रेफरेंस आता है और उनका आग्रह भी रहता है कि आप इन पुस्तकों को पढ़िए।इन्हीं प्रसंगों के बीच  उन्होंने एक बड़ी महत्त्वपूर्ण बात कही।उनका कहना था कि दुनिया को लगता था कि विचारधारा दुनिया को बदल देगी।लेकिन पुनर्जागरण के बाद टेक्नोलॉजी ने अलग ही बदलाव किया।वो कछुआ व खरगोश कहानी का उदाहरण देते है। उस कहानी की तरह आज टेक्नोलॉजी ड्राइविंग सीट पर है। यही  नहीं  अपने बातचीत का समापन उन्होंने बनारस को याद करते हुए किया।जहां उन्होंने अपने मेंटर कृष्णनाथ जी को याद किया ।वहीं काशीनाथ सिंह के काशी का अस्सी के एक प्रसंग का भी जिक्र किया।प्रो.कृष्णनाथ से उनकी चर्चा हो रही थी भारतीय संस्कृति व पश्चिम संस्कृति को...