कुछ तस्वीरें कुछ यादें
यह जानते हुए भी।
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| दरख़्तों की छायाएं |
कि आगे बढना
निरंतर कुछ खोते जाना
और अकेले होते जाना है
मैं यहाँ तक आ गया हूँ
जहाँ दरख्तों की लंबी छायाएं
मुझे घेरे हुए हैं...... अज्ञेय
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| चूल्ह |
कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त
कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त-नागार्जुन



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