इतिहास का भूला नायक

 

लचित बरफुकन


मध्यकालीन भारत का इतिहास पढ़े तो दिल्ली सल्तनत ,मुग़ल राजवंश ,मराठा ,विजयनगर व मोटा-माटी प्रांतीय राज्यों के बारे में है।आप किसी की पुस्तक उठा लीजिये उसमें इतना मिल ही जाएगा,इसी क्रम में जब औरंगजेब
को पढ़ते है तो उसके ढ़ेर सारे आयामों पर विस्तार से चर्चा
मिलती है जैसे -धार्मिक नीति, जजिया विवाद ,राजपूत नीति
दक्षिण अभियान ,मराठे व उसके समय हुए विद्रोह।उसके
विजय अभियान में असम एवं पूर्वी भारत का जिक्र आता
है।ये अभियान अहोम शासकों के साथ था और ये अभियान
लम्बा चला जिसमें मीर जुमला नायक है.....

आज जब एक अहोम शासक लचित बरफुकन की 400 वीं
जयंती मनाई जा रही है व हम थोड़ा सा इतिहास में उनके
बारे में न पढ़ पाये। इन्हीं के नाम पर NDA के सर्वश्रेष्ठ कैडेट
को स्वर्ण पुरस्कार दिया जाता है।पर हमारी किताब में थोड़
सा भी स्थान इस नायक को नहीं मिला है।हमें तो उनके
बारे में  शुभ्राष्ठा की किताब बैटल ऑफ सरायघट से जाना
की ये लड़ाई किसके मध्य हुई थी व किताब से असम की
राजनीति भी थोड़ी बहुत समझ आई व पूर्वोत्तर के
बारे में एक दिलचस्पी जगी। जो आगे अब बढ़ रही है क्योंकि
असम से हमारे मित्र व असम के गमछे से मैत्री प्रगाढ़ हुई।

असम के नायक लचित बुरफकन को 400वीं जयंती पर नमन🙏..

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