सर्दियों में धूप
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| सुबह -सुबह सूरज |
सर्द हवा चलने लगी है।धूप देर से निकल रही है ।हमारी तरह उसका भी कम्बल से निकलने का जी न चाह रहा हो।आराम किसे न सुखद लगता है?फिर भी हम जैसे -तैसे देर से निकलते है वो भी निकल ही आता है।हमारी तरह वो भी दिन के आरम्भ में मुचमुचाया रहता है।मानो उसकी आँख में भी किच्चर समाया हो ।कहीं देर तक वो भी व्हाट्सऐप पर ऑनलाइन रहा होगा या ट्विटर के ट्रेंड में शामिल रहा होगा?न देर रात तक पढ़ रहा होगा ,क्योंकि आजकल दिन छोटा हो रहा है?हम भी तो देर रात पढ़ते हैं क्योंकि रात्रि को हमारे मित्र हमें परेशान न करते हैं ।सिर्फ़ कभी -कभी गर्मा- गर्मा चाय के लिए इधर -उधर चला जाता हूँ।थोड़ा-बहुत व्हाट्सऐप पर स्टेट्स देख लेता हूँ,किसी को जवाब भी दे देता हूँ,किसी को जन्मदिन की बधाई भी लिख देता हूँ।वो भी कुछ ऐसा ही कर रहा होगा क्या?लेकिन मध्यान्ह के समय खूब चनका चमकता है।मानों आँखों से किच्चर साफ़ हो गया हो इसलिए साफ़ दिखने लगा हो,न मध्यान्ह की वजह से नहा- धो भोजन कर ऊर्जा मिल गयी हो। इसलिए चेहरा लाल दीप्त हो गया है बिलकुल बल्ब की तरह जल रहा है।खुले मैदान में

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