खलिहान में फ़सल की आमद


       

सुबह -सुबह सोया खलिहान


 बड़ी -बड़ी घांसे उग आई हैं, सब कुछ कबाड़ सा दिख रहा है। जहाँ -तहाँ प्रकृतिवासियों ने अपना आशियाना बनाया है

एक स्थान पर कुत्तियां ने बच्चें जने जो देखने में बड़े प्यार लगते है।मनहर सा स्वच्छ उज्ज्वल शरीर काले व सफेद मिश्रित रंग सा मोहक लगता है,छोटे बच्चें कान खींचकर चोर व ईमानदार का पता लगाकर उन्हें अपनी गोद में भरकर दौड़ पड़ते है ,हमारा कुत्ता व इनके ज़ोर से इनके मनपसंद नाम रखते है, अंग्रेजी का चलन है तो माइकल ,टमी और न जाने क्या?

          
  

                 
खलिहान की चहल -पहल

ख़ैर अब यहाँ ये सब न होगा क्योंकि फसल पकने लगी है,इतने दिनों से सोया खलिहान जग उठेगा।उस पर जल के छींटे तो पड़ेंगे ही साथ ही साथ फरसे से उसके इर्द -गिर्द जमी गन्दगी,कूड़े के ढ़ेर को हटा दिया जाएगा।गोबर से लिप -पोत उसका रंग रोगन हो जाएगा।फ़सल से उसका आँगन ढँक जावेगा। उसका अकेलापन भी कुछ दिनों तक न होवेगा।दिन-रात कुछ न कुछ लोग रहेंगे,यहाँ के बाशिंदे विस्थापित हो जावेंगे।फ़सल से भरा -पूरा रहेगा व आदमियों से घिरा।इससे एक तरफ खुशहाली तो रहेगी दूसरी तरफ आदमियों के  भिन्न -भिन्न व्यसनों से परेशानी भी हो सकती है? फिर भी जितना खलिहान भरेगा उससे किसान खुश होवेगा।उसका जी बाग़ -बाग़ होवेगा व भविष्य के निर्माण या वर्तमान की कितनी दुश्चिंताये भी इससे मिट जावेगी.......हाँ कुछ समय बाद खलिहान खाली हो जावेगा मानो महोत्सव के बाद बिखरा हुआ सन्नाटा।खलिहान तब अगली फ़सल तक चैन की नींद सो जावेगा,उसका आँगन नये बाशिंदों के लिए आशियाना बनेगा।

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