छायाचित्र की छाया में
आसिन-कातिक का सूरज दो बाँस दिन रहते ही कुम्हला जाता है। सूरज डूबने से पहले ही नननपुर पहुँचना है, हिरामन अपने बैलों को समझा रहा है - 'कदम खोल कर और कलेजा बाँध कर चलो ...
हमारे साथ ऐसा न है फिर भी समय से पहुँच जाना चाहिए।
लेकिन यहाँ गाड़ीवान दुसरा है ,गाड़ीवान को कोई जल्दबाजी न है।वो आनन्द के साथ मन्थर -मन्थर चलने वाला है । जहाँ नयनाभिरामदृश्य दिख जाये पल भर ठहर का सजल नेत्रों से उसका पान कर आगे बढ़ना चाहता है। साथ में दो जन और है वो भी उसमें वैसे ही शरीक है जैसे दूध में मिश्री।हम भी अछूते न है सामने पड़े दृश्य या बातचीत इस नौउम्र में किसे न अच्छी लगेगी और साथ है तो हाँ में हाँ जरूर करनी होगी। ज्यादा मीन -मेख किया तो गाड़ीवान उतार भी देगा और फेसबुक पर स्टोरी लगाकर हमारी दुर्गति भी कर सकता है। इसलिए मन्थर -मन्थर ही सही आगे बढ़ा जाए और इस सफ़र का आनन्द लिया जाये। यहाँ आनन्द मानो सूख गया है कहीं भी कुछ न जो है सब उजाड़ और सूखा। कारण भी है
गाड़ीवान का मानना है की इस बरस उतनी बरसात न हुई है।
धान जितना पहले रोपा जाता था इस साल उसका छठाँश भी न रोपा गया।
इसलिए कहीं थोड़े बहुत धान और जहाँ खेत तैयार है वहाँ आलू ,सरसों ,मिर्च ,मटर की हरियाली दिख रही है।बाकी और किस्म की हरियाली तो दिख न रही है या कोई गन्ध की बयार भी न बह रही है कि गाड़ीवान अपनी गाड़ी हांक दे।हाँ इस बीच सड़क के किनारे पर लगी बबूल जो दोनों तरफ से सड़क को ढँक दे रही है। यहाँ इंस्टाग्राम वाइब्स के लिए सुंदर छाया चित्र लिए जा सकते है। गाड़ीवान अपने वन प्लस से ग्रामीण का छाया चित्र लेता है।ये बिलकुल नयनाभिराम दृश्य और ये आनंद के साथ स्वान्त सुखाय वाला भी क्षण है।बाकी तो गाड़ीवान की एक ही कसम है कि एक खूब सुंदर हमारा छाया चित्र उतार दीजिये और एक सुन्दर सी कविता के साथ
फेसबुक पोस्ट बाकी सब तो माया है।अनयास ही मुंह से निकल जाता है हरिओम हरिओम !पर ग्रामीण का छायाचित्र
देख कविता निकल ही पड़ती है....कुँवर नारायण की
"एक हरा जंगल धमनियों में जलता है।"

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