जय छठी मैया
हे पीताम्बरधारी ! सादर प्रणाम ।
पीताम्बर देखने से ऐसे भी आह्लाद प्रकट होता है क्योंकि कालयवन की कथा याद आ जाती है और उसका काल कलवित हो जाना किन्तु यहाँ सन्ताप ,पीड़ा को काल कलवित करने के लिए सहचर का आगमन है ,छठ मैया मनोरथपूर्ण करें ....बाकी कुबेरनाथ राय रस आखेटक में लिखते है "कहते हैं कि किसी-२ चेहरे को देख कर दृष्टिस्नान का सुख मिलता है, दृष्टि दर्पण-सी निर्मम हो उठती है, शरीर के भीतर तीन दर्पण है:मुखदर्पण ,दृष्टिदर्पण और मनदर्पण।"
फिलहाल ऐसा ही लग रहा है।

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