ब्राह्मण वोट बैंक से हासिल होगा लखनऊ का तख्त ___________________________________                                                                             यूपी में अगले साल चुनाव है जिसकी गर्मी अभी से बढ़ गयी है जहां एक तरफ भाजपा के संगठन के पदाधिकारी लखनऊ में बैठके कर रहें वहीं अखिलेश भी इन दिनों जिलों के दौरे पर है .इन सबके बीच नेताओं का पाला बदलना भी शुरू हो गया .कांग्रेस के फैब थ्री (जितिन प्रसाद ,सिंधिया ,पायलट)  कल पियूष गोयल की अध्यक्षता में भाजपा में शामिल हो गए जिनका नाम कभी राहुल गांधी के करीबी के तौर पर लिया जाता था .



फोटो साभार -जी  न्यूज़


  अब कयासों का दौर शुरू हो गया है जितिन प्रसाद के आने से किसका फायदा किसका नुकसान है या अब कांग्रेस को आत्ममंथन को जरूरत है क्योंकि दूसरी पीढ़ी के नेता अब उसके पास नहीं है .कहा तो ये भी जा रहा है की भाजपा को एक ब्राह्मण चेहरे की तलाश थी जिसका जनाधार बड़ा हो और पार्टी उसको ब्राह्मण चेहरे के रूप में पेश करें .किंतु जितिन प्रसाद को हाल में कोई बहुत बड़ी सफलता नहीं मिली जिससे इन बातों को बल मिलता हो क्योंकि 2014 व् 2019 में लोकसभा वहीं 2017 में विधानसभा का चुनाव वो हार चुके है .

 वहीं जहां तक ब्राह्मण वोट बैंक की बात है तो योगी के सत्ता में आने के बाद ब्राह्मण उनसे कोई सन्तुष्ठ नहीं है भले ही भाजपा के पास सबसे ज्यादा ब्राह्मण विधायक (44)है .उनकी नाराजगी खासकर विकास दुबे और विजय मिश्र पर हुई कारवाई को लेकर नाराज हुए .भले ही परशुराम जयंती पर छुट्टी या मूर्ति लगाने को लेकर उनको लुभाने का प्रयास किया जा रहा है .

 वहीं जितिन प्रसाद भी कुछ दिन पहले ब्राह्मण चेतना मंच बनाकर ब्राह्मणों को एकजुट करने का प्रयास कर रहें थे परन्तु कोई ख़ास सफलता हाँथ नहीं लगी .कहा तो ये भी जाता है कि उनकी इसी सक्रियता की वजह से कांग्रेस के खेमे में खलबली मची क्योंकि यूपी की राजनीती में प्रियंका काफी सक्रिय है और उनके समर्थक किसी दूसरे को नहीं पचा सकते .ऐसे में जितिन को बंगाल का प्रभारी बनाकर भेज दिया गया जहां उनको एक सीट भी हासिल नहीं हुई उन्हें इस बात का देर से पता चला दरअसल उनको यहाँ से भेजने के पीछे मकसद क्या था .

  किंतु जितिन भले ही कोई ज्यादा लाभ न दे पाये परन्तु यूपी की राजनीति में ब्राह्मणों को नज़र अंदाज कोई नहीं कर सकता क्योंकि दस बारह फीसदी की आबादी एक बड़ा फैक्टर है और यहीं से लखनऊ की सियासत पर काबिज होया जा सकता है .इसीलिए सारी पार्टियां ब्राह्मणों को लुभाने में लगी है .जहां तक पिछले विधानसभा में ब्राह्मण वोट बैंक भाजपा के पक्ष में ही रहा है वहीं कांग्रेस की ओर अधिकतर मुसलमान वोट ही रहा .इसीलिए बार -२कहा जा रहा है की जितिन के जाने से कोई बहुत हानि नहीं है .यहाँ तक की यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भी कह रहें है कि 'किसी के आने -जाने से फर्क नहीं पड़ता ।'

 लेकिन भाजपा ब्राह्मण वोट बैंक को भुलाने के पूरे मूड में है क्योंकि कहा जा रहा है कि जितिन को एम् एल सी बनाकर जल्द ही यूपी सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है .यही नहीं एक और ब्राह्मण चेहरा एके शर्मा को भी मंत्री बनाने की बात चल रही है ऐसे में  ये देखना दिलचस्प होगा की क्या भाजपा अपने इस तीर से ब्राह्मणों की नाराजगी दूर कर उनके वोट बैंक में तब्दील कर पाती है या नहीं .यही नहीं ये भी देखना होगा की पार्टी पुराने कार्यकर्ताओं को कैसे सन्तुष्ठ रखेगी .

  वहीं कांग्रेस को नुकसान और लाभ की अपेक्षा पहले अपने कार्यकर्ताओं को एक जुट रखने की बड़ी चुनौती होगी क्योंकि मिशन यूपी तभी मुक्कमल होगा जब पार्टी के पास बड़ा चेहरा होगा जिसका अपना जनाधार होगा भले ही जितिन कोई जनाधार न हो चुनाव हार गए हो लेकिन शाहजहाँपुर और उसके पास उनकी ठीक ठाक पकड़ है .ऐसे में कांग्रेस को जरूर आत्म चिंतन की आवश्यकता है ?

Comments

Popular posts from this blog

दिल्ली दरबार

सादगी सार्वभौमिकता का सार है -गांधी

मदन काशी