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Showing posts from March, 2022

मुंडेश्वरी धाम :संस्मरण

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 कमरे का दरवाजा खोलते ही अंधकार बाहर हो जाता है ;सामने आकाश से तारे गायब हैं सिर्फ चाँद निस्तेज की अवस्था में लटका है ।सहसा मुझे लगता है सब चले गए होंगे । इस चाँद की तरह मैं भी निस्तेज हूँ जो न उठने के मोह में पड़ा हूँ ।आज विभाग की तरफ से शैक्षणिक भ्रमण यात्रा है . मुंडेश्वरी देवी के धाम जाना है ,यहीं से बिहार दर्शन भी होगा। प्रारम्भ  चित्र-सिमरन देवा       चंदौली की सीमा को छोड़ते ही बिहार शुरू हो जाता है ।बीच में कर्मनाशा पड़ती है जिनके ऊपर मनहूसियत का अतिरिक्त बोझ है ,स्नान करने से सारे पुण्य धुल जाते हैं पर मुझे तो कर्मनाशा से 'कर्मनाशा की हार' याद आती है ।ख़ैर बिहार जो कभी भारत का सिरमौर्य रहा है ,जिसे आज गाली की शक्ल में भी प्रयोग कर लेते हैं ।उसी बिहार में प्रवेश करते चौराहों पर क्रांतिकारी वीरों  की प्रतिमा दिखती है ।सुकालू लोहार ,बाबू कृष्ण सिंह व कामरेड बुटन मास्टर का झण्डा ,एकाद और दिखी पर पोस्टरों से ढँक गयी थी ।जैसे -जैसे बिहार में दाखिल होते गए है ,उसकी विविधता दिखती गयी ।        सड़कें एकाद जगह टूटी मिली पर उन पर काम चल रह...

अँधेरे को मिटाने वाली है 'चाँदपुर की चन्दा'

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एक ब्लॉग पढ़ा था' पियवा से पहिले हमार रहलु (सन्दर्भ सहित व्याख्या)' अतुल राय ।पढ़ने के अगले चार रोज़ सिर्फ हंसता रहा और आज भी हंसने -हंसाने का जिक्र हो तो उसी को पढ़ता हूँ ।ब्लॉग वहीं है पर अतुल जी स्क्रीन राइटर हो गए है, इसी क्रम में एक उपन्यास प्रकाशित हुआ है 'चाँदपुर की चन्दा' जिसे हमने पढ़ा और ये पोस्ट उसी का सार है ।अद्भुत किस्म का लेखन ;गाँव -मथार का जीवन्त प्रतीक है ।जितनी देर आप पढ़ेंगे लगेगा की गाँव जो आपका छूट चुका ,वहाँ फिर से पहुंचकर इस जीवन का आनंद लिया जाये । अपने भीतर के  मन्टू को उन्हीं गलियों में टटोल जाये ,तो पहली दफ़ा में इसको पढ़ जाइए ……. चाँदपुर की चन्दा-अतुल राय फाल्गुन चढ़ रहा है ,हवा सुरसुरा के बह रही है जो शीतल कम जलनशील ज्यादा लग रही है ।ये समय और हवा ही ऐसी नहीं है ;इसी के बीच बोर्ड की परीक्षा होती है ।परीक्षा से घबराहट तो जायज़ पर बोर्ड से तो न जाने क्या -क्या बड़ जाये ?हालांकि गाज़ीपुर व बलिया में कम धुक -धुकी होती है यहाँ यन्त्र का मायाजाल है जो सबकी पीड़ाओं को मुक्त कर देता है। दूर दराज के लोग यहाँ आते है पीड़ा से मुक्त होने के लिए ।इस साल भी आये है ,बं...
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  ब्राह्मण वोट बैंक से हासिल होगा लखनऊ का तख्त ___________________________________                                                                             यूपी में अगले साल चुनाव है जिसकी गर्मी अभी से बढ़ गयी है जहां एक तरफ भाजपा के संगठन के पदाधिकारी लखनऊ में बैठके कर रहें वहीं अखिलेश भी इन दिनों जिलों के दौरे पर है .इन सबके बीच नेताओं का पाला बदलना भी शुरू हो गया .कांग्रेस के फैब थ्री (जितिन प्रसाद ,सिंधिया ,पायलट)  कल पियूष गोयल की अध्यक्षता में भाजपा में शामिल हो गए जिनका नाम कभी राहुल गांधी के करीबी के तौर पर लिया जाता था . फोटो साभार -जी  न्यूज़   अब कयासों का दौर शुरू हो गया है जितिन प्रसाद के आने से किसका फायदा किसका नुकसान है या अब कांग्रेस को आत्ममंथन को जरूरत है क्योंकि दूसरी पीढ़ी के नेता अब उसके पास नहीं है .कहा तो ये भी जा रहा है की भाजपा को एक ब्राह्मण चेहरे ...