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Showing posts from October, 2022

जय छठी मैया

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  हे पीताम्बरधारी ! सादर प्रणाम । पीताम्बर देखने से ऐसे भी आह्लाद प्रकट होता है क्योंकि कालयवन की कथा याद आ जाती है और उसका काल कलवित हो जाना किन्तु यहाँ सन्ताप ,पीड़ा को काल कलवित करने के लिए सहचर का आगमन है ,छठ मैया मनोरथपूर्ण करें ....बाकी कुबेरनाथ राय रस आखेटक में लिखते है " कहते हैं कि किसी-२ चेहरे को देख कर दृष्टिस्नान का सुख मिलता है, दृष्टि दर्पण-सी निर्मम हो उठती है, शरीर के भीतर तीन दर्पण है:मुखदर्पण ,दृष्टिदर्पण और मनदर्पण।" फिलहाल ऐसा ही लग रहा है।             छठ घाट जाता व्रती                    

बरक्षा में

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 दुआर बुहार दिया गया है,सामने जगजगाती हुई नई कुर्सियां रखी हैं उनके नये होने का संकेत उन पर अभी चिपका हुआ स्टीकर है जिन्हें छोटे बच्चे बैठने के बाद खुर्च रहें हैं। उनके बैठने का प्रयोजन भी है , आस- पास चाशनी में लिपटी हुई बूंदी और रस में उतराये हुए गुलाबजामुन की गमक उनके मन को रमा रही है पर बूढ़े भी कम न ठण्ड की सिहरन की आहट और धूप का स्वाद सेंकने के प्रारम्भ में पेट को दिव्य व्यंजन और आहार इस हेमन्त में मिले तो कोई भी सुखदायी होगा।मौक़ा है बियाह का  दूसरी भाषा में ब्रह्मचर्य से गृहस्थ का ।                   चौका पे बैठे भावी वर  आखिर में विनोद कुमार शुक्ल (नौकर की कमीज़)में भी लिखते है"शादी के लिए जवानी उम्र से नहीं, नौकरी से मिलती है।"  बाकी गाली तो गायी ही जा रही है" बबुआ हमार पढ़ें अंग्रेजी तिलक काहे थोर जी ।"